अन्याय और शोषण के विरुद्ध हुंकार: संगठित संघर्ष से ही खुलेगी नारी मुक्ति की राह

रामनगर (पटरानी): अंतरराष्ट्रीय कामगार महिला दिवस की पूर्व संध्या पर ‘प्रगतिशील महिला एकता केंद्र’ द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी में महिलाओं के दोहरे उत्पीड़न और पूंजीवादी व्यवस्था की विसंगतियों पर तीखा प्रहार किया गया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक महिलाएं रसोई की चारदीवारी और कम वेतन के शोषण से मुक्त नहीं होंगी, तब तक वास्तविक आजादी एक सपना मात्र रहेगी।

मासूमों की शहादत पर मौन और क्रांतिकारी गीतों से गूंजा पटरानी

​गोष्ठी का आगाज़ वैश्विक संवेदनाओं के साथ हुआ। अमेरिका-इजरायल गठजोड़ द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों में हताहत मासूम बच्चों और निर्दोष नागरिकों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। इसके तुरंत बाद, “नारी मुक्ति झंडा हम फहरायेंगे, शोषण मुक्ति झंडा हम फहरायेंगे” के क्रांतिकारी गीतों ने उपस्थित महिलाओं में नए जोश का संचार किया।

दोहरी मार: घर की चक्की और कार्यस्थल का शोषण

​विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने महिलाओं की जमीनी हकीकत को आंकड़ों और अनुभवों के साथ साझा किया। उन्होंने कहा:

  • शारीरिक शोषण: घर से लेकर फैक्ट्री और खेतों तक ‘हाड़तोड़’ मेहनत के बावजूद महिलाओं को न आराम मिलता है, न पौष्टिक आहार। परिणाम स्वरूप, वे समय से पहले गंभीर बीमारियों की शिकार हो रही हैं।
  • घरेलू कार्य एक बाधा: वक्ताओं ने पुरजोर ढंग से कहा कि घरेलू काम महिलाओं की आत्मनिर्भरता के मार्ग में सबसे बड़ी रुकावट है। इसे ‘मजबूरी’ के बजाय ‘शौक’ बनाने के लिए सरकारी स्तर पर सामूहिक कैंटीन और कपड़े धोने के केंद्रों की स्थापना होनी चाहिए।

कानूनों की अवहेलना और ‘सरकारी बेगारी’ पर प्रहार

​पूंजीवादी व्यवस्था पर निशाना साधते हुए वक्ताओं ने कहा कि न्यूनतम वेतन और समान काम के लिए समान वेतन जैसे कानून आज महज किताबों की शोभा बढ़ा रहे हैं।

​”आशा वर्कर्स, भोजनमाता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से सरकार खुद ‘मामूली मानदेय’ पर बेगारी करा रही है। फैक्ट्रियों में मातृत्व अवकाश मांगना नौकरी गंवाने का सबब बन जाता है। महिलाओं को ‘सस्ते श्रमिक’ के रूप में इस्तेमाल करना बंद करना होगा।”

कल निकलेगा इंकलाबी जुलूस

​गोष्ठी में तुलसी छिंवाल, रोहित रुहेला, शारदा देवी और रवि कुमार सहित कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। कार्यक्रम के समापन पर आह्वान किया गया कि 8 मार्च को सुबह 11 बजे प्राइमरी स्कूल घास मंडी (रामनगर) में आयोजित होने वाली आम सभा और जुलूस में भारी संख्या में पहुंचकर अपने अधिकारों की आवाज बुलंद करें।

प्रमुख मांगें जो गोष्ठी में उठीं:

  1. ​कार्यस्थलों पर अनिवार्य क्रेच (शिशुशाला) और कैंटीन की सुविधा।
  2. ​समान कार्य के लिए समान वेतन और मातृत्व अवकाश का सख्ती से पालन।
  3. ​रिहायशी इलाकों में सामूहिक भोजनालयों की स्थापना।

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