रुद्रपुर।ईदगाह बचाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर सोमवार को रुद्रपुर की खेड़ा बस्ती में स्थित ईदगाह, मदरसा, स्कूल के खेल मैदान, कब्रिस्तान व करबला की भूमि पर नगर निगम प्रशासन द्वारा किए गए कथित जबरन कब्जे के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया गया। विभिन्न सामाजिक संगठनों, मजदूर संगठनों, ट्रेड यूनियनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर को ज्ञापन भेजा।जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में प्रदर्शनकारियों ने अपर जिलाधिकारी (राजस्व) को ज्ञापन सौंपा। साथ ही इसकी प्रतियां राष्ट्रीय एवं राज्य अल्पसंख्यक आयोग, मानवाधिकार आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्षों तथा नगर निगम रुद्रपुर के मेयर और नगर आयुक्त को भी प्रेषित की गईं।
दशकों से उपयोग में रही भूमि को अतिक्रमण बताकर कब्जे का आरोप
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि खेड़ा बस्ती में स्थित मस्जिद, ईदगाह और कब्रिस्तान की वह भूमि, जिसका उपयोग मुस्लिम समाज वर्षों से धार्मिक, सामाजिक कार्यक्रमों, शादी-ब्याह और बच्चों के खेल मैदान के रूप में शांतिपूर्ण एवं विधिसम्मत ढंग से करता आ रहा था, उसे नगर निगम प्रशासन ने हाल ही में अतिक्रमण बताकर अपने कब्जे में ले लिया है।
वक्ताओं ने कहा कि यह भूमि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के अंतर्गत प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता और परंपरागत अधिकारों से जुड़ी हुई है। ईदगाह और कब्रिस्तान जैसी धार्मिक भूमि को इस प्रकार हस्तगत किया जाना स्थानीय नागरिकों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है, जिससे सामाजिक सौहार्द और शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
20–25 हजार लोगों की नमाज़, अब आयोजन पर संकट
आंदोलनकारियों के अनुसार उक्त भूमि पर वर्ष भर बड़े धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता रहा है, जहां सामूहिक नमाज़ में 20 से 25 हजार तक लोग शामिल होते रहे हैं। भूमि के कब्जे में चले जाने से भविष्य में इन कार्यक्रमों के आयोजन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न होंगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में नगरपालिका द्वारा बनाए गए बारात घर को भी कब्जे में ले लिया गया है तथा मस्जिद में आने वाले लोगों के लिए बनाए गए शौचालयों को प्रशासन ने सील कर दिया है।
कब्रिस्तान में जगह की कमी, बच्चों के खेल पर असर
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि कब्रिस्तान में खाली जगह न होने से शवों को दफनाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। रेशमबाड़ी और पहाड़गंज की ओर से नमाज़ व शव दफनाने के रास्ते बंद कर दिए जाने से लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। वहीं खेल का मैदान न होने से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
भड़काऊ बयानों पर रोक लगाने की मांग
ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि धार्मिक कार्यक्रमों और दफन के लिए भूमि उपलब्ध नहीं रही, तो आने वाले समय में प्रशासन के लिए भी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मानवीय व सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने के बजाय कुछ सांप्रदायिक तत्व उकसावेपूर्ण बयान देकर तनाव बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से ऐसे तत्वों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
इन संगठनों और नेताओं ने की शिरकत
प्रदर्शन में क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के शिवदेव सिंह, इंकलाबी मजदूर केंद्र के कैलाश भट्ट, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की रविंदर कौर, डालफिन मजदूर संगठन की सुनीता, सेंटर फॉर स्ट्रगलिंग ट्रेड यूनियंस के मुकुल, एक्टू की अनीता अन्ना, सीपीआई (एमएल) के ललित मटियाली सहित अनेक संगठनों के प्रतिनिधि, पार्षद, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
