ट्रम्प और नेतन्याहू का पुतला दहन: वक्ताओं ने कहा- ‘परमाणु हथियार तो महज बहाना, ईरान के संसाधनों की लूट और सत्ता परिवर्तन है असली निशाना’
लालकुआं/रुद्रपुर/काशीपुर/दिल्ली:28 फरवरी से ईरान पर शुरू हुए अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमलों के विरोध में आज भारत के विभिन्न हिस्सों में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। उत्तराखंड के तराई क्षेत्रों से लेकर देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर तक, मजदूर संगठनों, महिला इकाइयों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर अमेरिकी साम्राज्यवाद और इजरायली ‘जायनवाद’ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पुतले फूँककर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

मासूमों की शहादत पर उपजा गुस्सा
लालकुआं, रुद्रपुर और काशीपुर में आयोजित सभाओं में वक्ताओं ने ईरान में हुए जान-माल के नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई सहित सैकड़ों निर्दोष नागरिक मारे गए हैं। विशेष रूप से एक स्कूल की 55 छात्राओं की मौत ने प्रदर्शनकारियों को झकझोर कर रख दिया है। रुद्रपुर के गांधी पार्क में आयोजित सभा में मृतकों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

’अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ाई गईं’
विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि यह हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) और 51 का खुला उल्लंघन है। काशीपुर में इंकलाबी मजदूर केंद्र के सचिव पंकज ने कहा, “ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता सकारात्मक दिशा में थी, लेकिन ट्रम्प प्रशासन ने समझौते से ठीक पहले हमला कर साबित कर दिया कि उनका मकसद शांति नहीं, बल्कि ईरान की संप्रभुता को रौंदना और वहां की तेल संपदा पर कब्जा करना है।” वक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि इस युद्ध से केवल अमेरिकी हथियार कंपनियों के शेयर बढ़ रहे हैं, जबकि कीमत आम जनता को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर वामपंथी दलों का साझा प्रदर्शन
राजधानी दिल्ली में भाकपा, माकपा, भाकपा-माले (लिबरेशन), इंकलाबी मजदूर केंद्र और लोकपक्ष सहित दर्जनों वामपंथी व जनवादी संगठनों ने जंतर-मंतर पर साझा प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए मांग की कि प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल और अमेरिका के इस ‘नंगे सैन्य आक्रमण’ की स्पष्ट निंदा करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि मध्य पूर्व में युद्ध भड़कने से खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा और देश की तेल आपूर्ति पर गंभीर संकट मंडरा सकता है।

प्रमुख मांगें और संकल्प:
प्रदर्शनकारी संगठनों ने भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- तत्काल युद्धविराम: अमेरिका और इजरायल तुरंत हमले बंद कर ईरान से पीछे हटें।
- भारत की भूमिका: भारत सरकार संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से शांति वार्ता का नेतृत्व करे।
- सुरक्षा की गारंटी: खाड़ी देशों में फंसे भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- एकजुटता: दुनिया भर के मेहनतकश लोग साम्राज्यवादी मंसूबों के खिलाफ एकजुट हों।

प्रदर्शन में प्रमुख उपस्थिति:

इन कार्यक्रमों में दिनेश, विजय, मुकुल, धीरज, शिवदेव सिंह, रविन्द्र कौर, ललित मटियाली, अनीता अन्ना, हरीश मौर्या, पंकज, प्रेम प्रसाद, पुष्पा, बिंदु, अंतरा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने ‘साम्राज्यवाद की कब्र खुदेगी-एशिया की धरती पर’ और ‘युद्ध नहीं, शांति चाहिए’ जैसे नारों के साथ अपना विरोध दर्ज कराया।
