उत्तरकाशी: उत्तरकाशी जनपद के 66वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक ‘मां रेणुका मंदिर मेले’ की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। शुक्रवार को डुंडा ब्लॉक सभागार में ब्लॉक प्रमुख राजदीप सिंह परमार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई, जिसमें मेले के भव्य आयोजन को लेकर विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई।
प्रमुख आकर्षण और सांस्कृतिक छटा
बैठक में निर्णय लिया गया कि इस बार भी परंपरा का निर्वहन करते हुए 15 से 16 देव डोलियों को आमंत्रित किया जाएगा। मेले का मुख्य आकर्षण सात दिनों तक चलने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे, जिसमें जनपद के उभरते कलाकारों और स्कूली बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए विशेष मंच प्रदान किया जाएगा।
प्रशासनिक सेवाएं और जनहित के कार्य
मेला केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनता के लिए ‘सिंगल विंडो’ सुविधा केंद्र भी बनेगा। ब्लॉक प्रमुख ने बताया कि:
- सरकारी सुविधाएं: आधार कार्ड अपडेट, स्थायी निवास, जाति प्रमाण पत्र और परिवार रजिस्टर की नकल जैसी सुविधाएं मौके पर ही उपलब्ध कराई जाएंगी।
- स्वास्थ्य सेवाएं: देहरादून के नामी अस्पतालों और ग्राफिक एरा के सहयोग से 7 दिनों तक चिकित्सा शिविर और अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी।
“यह मेला उत्तरकाशी के अस्तित्व और गौरव का प्रतीक है। हमारा प्रयास है कि मेले के माध्यम से न केवल संस्कृति का संरक्षण हो, बल्कि आम जनता को सरकारी सेवाओं का सीधा लाभ भी मिले।” — राजदीप सिंह परमार, ब्लॉक प्रमुख
बैठक में मौजूद रहे दिग्गज
बैठक में भाजपा जिलाध्यक्ष नागेंद्र सिंह चौहान, पूर्व राष्ट्रीय पदाधिकारी स्वराज विद्वान, जिला पंचायत सदस्य भारत सिंह बिष्ट और खंड विकास अधिकारी दिनेश चंद जोशी सहित कई जनप्रतिनिधियों ने अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। सभी ने एक स्वर में जनपदवासियों से इस भव्य आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।
इतिहास पर एक नज़र: बता दें कि उत्तरकाशी जनपद 24 फरवरी 1960 को टिहरी जिले से अलग होकर अस्तित्व में आया था। तब से ही स्थापना दिवस को एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
