नैनीताल/रामनगर | मुख्य संवाददाता ऐतिहासिक और करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र गर्जिया देवी मंदिर के अस्तित्व को बचाने के लिए चल रहा सुरक्षात्मक कार्य अब ‘वॉर फुटिंग’ (युद्ध स्तर) पर होगा। मंदिर के टीले को ढहने से बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने अब कार्य की अवधि को 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे कर दिया है।
हाल ही में स्थलीय निरीक्षण पर पहुंचे सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता संजय शुक्ल ने स्पष्ट किया कि मानसून की पहली दस्तक से पहले मंदिर को सुरक्षित घेरे में लेना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
12 करोड़ का सुरक्षा कवच, जून की डेडलाइन बढ़ी
करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस सुरक्षा चक्र के बारे में मुख्य अभियंता ने बताया कि कार्य के दौरान क्वांटिटी (मात्रा) में बदलाव और एस्टीमेट रिवाइज होने के कारण अब इसकी समय सीमा (डेडलाइन) को आगे बढ़ाया जा रहा है। तकनीकी बारीकियों और बढ़े हुए कार्यभार को देखते हुए ठेकेदार को टाइम एक्सटेंशन दिया जाएगा, लेकिन मानसून से पहले किसी भी ढिलाई की अनुमति नहीं होगी।
मानसून से पहले ‘HFL’ तक दीवार बनाना अनिवार्य
मुख्य अभियंता ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा:
“मानसून आने से पहले हाई फ्लड लेवल (HFL) तक रिटेनिंग वॉल का निर्माण हर हाल में पूरा होना चाहिए। अगर पानी बढ़ने से पहले यह दीवार नहीं बनी, तो अब तक किया गया सारा श्रम और निवेश खतरे में पड़ सकता है।”
उन्होंने निर्देश दिए कि नदी के भीतर चल रहे कार्यों को पहली प्राथमिकता दी जाए। प्लाटिंग और फिनिशिंग का काम बारिश के बाद भी किया जा सकता है, लेकिन बुनियादी ढांचा अभी तैयार होना जरूरी है।
क्यों जरूरी है यह कार्य? (फ्लैशबैक)
- 2010 की त्रासदी: भीषण बाढ़ के बाद मंदिर के टीले में गहरी दरारें आ गई थीं।
- खतरे में आस्था: समय के साथ दरारें चौड़ी होती गईं, जिससे मुख्य ढांचे पर खतरा मंडराने लगा।
- दूसरा चरण: मई 2024 में पहला चरण पूरा होने के बाद, अब दूसरे फेज में नदी की ओर से हो रहे कटाव और ढीले ब्लॉक्स को मजबूत किया जा रहा है।
क्वालिटी चेक: मुख्य अभियंता ने स्थानीय अधिकारियों को दो टूक कहा है कि काम की गति बढ़ाने के चक्कर में गुणवत्ता (Quality) से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। तकनीकी मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
