गैरसैंण।उत्तराखंड को अपने पैरों पर खड़ा करने और देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में लाने के लिए राज्य सरकार ने एक मास्टर प्लान तैयार किया है। मुख्यमंत्री ने कृषि, उद्योग और पर्यटन को विकास की यात्रा का मुख्य ‘ड्राइवर’ करार देते हुए बजट का बड़ा हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों को समर्पित किया है। सरकार का स्पष्ट विज़न है—उत्पादकता में वृद्धि, भारी निवेश का आकर्षण और स्थानीय युवाओं के लिए सम्मानजनक आजीविका।
खेत-खलिहानों में ‘महक’ और ‘मिशन’ की गूँज
कृषि क्षेत्र को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। पारंपरिक खेती के साथ-साथ राज्य अब कीवी, ड्रैगन फ्रूट और सेब उत्पादन (मिशन एप्पल) पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
- सुरक्षा और बीमा: फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए घेराबड़ हेतु 20 करोड़ और उद्यान बीमा के लिए 40 करोड़ की व्यवस्था की गई है।
- महक क्रांति: सगंध पौधों के विकास और इत्र-सुगंध उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 10 करोड़ की विशेष राशि आवंटित की गई है, जो राज्य की आर्थिकी को नई खुशबू देगी।
उद्योग: स्वरोजगार और निवेश का नया हब
सूक्ष्म और लघु उद्योगों (MSME) को राज्य की रीढ़ मानते हुए सरकार ने स्टार्टअप्स और स्थानीय उद्यमियों के लिए खजाना खोल दिया है।
- MSME सहायता: छोटे उद्योगों को मजबूती देने के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
- स्वरोजगार: मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 60 करोड़ रुपये युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए दिए जाएंगे।
- मेगा पॉलिसी: टेक्सटाइल और बड़े उद्योगों को आकर्षित करने के लिए 25 करोड़ का अनुदान रखा गया है, ताकि राज्य में बड़े स्तर पर रोजगार सृजित हो सके।
पर्यटन: देवभूमि की वैश्विक पहचान पर दांव
पर्यटन केवल यात्रा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान है। सरकार ने पर्यटन विभाग के पूंजीगत और राजस्व मदों में भारी निवेश की घोषणा की है।
- विश्वस्तरीय ढांचा: वैश्विक पर्यटन स्थलों के विकास के लिए 10 करोड़ और ईको-टूरिज्म गतिविधियों के लिए 18.50 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
- योग और अध्यात्म: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन के माध्यम से उत्तराखंड को दुनिया की ‘योग राजधानी’ के रूप में स्थापित करने के लिए 2 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
