धामी सरकार का बजट ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ और ‘पुरानी बोतल में नया शरबत’: यशपाल आर्य

देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा में सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा पेश किए गए बजट पर विपक्ष ने तीखा हमला बोला है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने बजट को पूरी तरह “दिशाहीन, निराशाजनक और जमीनी हकीकत से कटा हुआ” करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विकास के नाम पर केवल जादुई आंकड़ों का भ्रम पैदा किया है, जबकि प्रदेश कर्ज के गहरे दलदल में फंसता जा रहा है।

कर्ज के बोझ तले दबता उत्तराखंड: ₹1 लाख करोड़ का आंकड़ा पार

​यशपाल आर्य ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि सरकार के कुप्रबंधन के कारण उत्तराखंड पर कर्ज का बोझ 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा:

​”2016-17 में जो कर्ज ₹35 हजार करोड़ था, वह 2026 तक ₹1 लाख करोड़ को पार कर गया है। स्थिति इतनी विकट है कि कर्मचारियों के वेतन के लिए भी बाजार से कर्ज लेना पड़ रहा है। यह सरकार प्रदेश के इतिहास में सबसे ज्यादा कर्ज लेने वाली सरकार बन गई है।”

बजट की 5 बड़ी ‘नाकामियां’: नेता प्रतिपक्ष के वार

क्षेत्रयशपाल आर्य का आरोप
खर्च में विफलतामूल बजट का केवल 50% और कुल बजट का मात्र 45% ही खर्च हो पाया।
युवा व किसानकिसानों की आय दोगुनी करने का वादा कागजों तक सीमित; MSP और GST पर चुप्पी।
स्वास्थ्य सेवाएंअस्पतालों में डॉक्टरों का भारी अभाव, मरीज हायर सेंटर रेफर होने को मजबूर।
गैरसैंण की उपेक्षा₹2500 करोड़ की घोषणा गायब; भाजपा के लिए गैरसैंण आज भी ‘गैर’ ही बना हुआ है।
शिक्षा व्यवस्थास्कूल बंद हो रहे हैं, आईटीआई और पॉलीटेक्निक संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं।

“पुरानी बोतल में नया शरबत”

​आर्य ने तंज कसते हुए कहा कि बजट में कुछ भी नया नहीं है, बस पुराने वादों की पुनरावृत्ति की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़कें बदहाल हैं और उद्योग क्षेत्र के लिए ‘कैपिटल मद’ में कोई प्रावधान न होना यह दर्शाता है कि सरकार के पास बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कोई ठोस विजन नहीं है।

सामाजिक न्याय के मोर्चे पर छलावा

​नेता प्रतिपक्ष ने बजट को “विकास अवरोधी” बताते हुए कहा कि दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और मध्यम वर्ग के लिए इस बजट में कोई क्रांतिकारी योजना नहीं है। महंगाई से त्रस्त जनता को राहत देने के बजाय सरकार केवल ‘डीपीआर’ (DPR) बनाने के खेल में उलझी हुई है।

​यशपाल आर्य ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह बजट संकल्पविहीन और प्रतिगामी है, जो आम आदमी की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेरता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *