नववर्ष के पहले दिन बिनसर के जंगल में कंकाल मिलने से सनसनी, दो माह से लापता व्यक्ति की हुई पहचान

अल्मोड़ा। नए साल की शुरुआत के साथ ही अल्मोड़ा जनपद के बिनसर क्षेत्र से सनसनीखेज मामला सामने आया है। बिनसर के सुनियापानी इलाके में जंगल के भीतर एक व्यक्ति का कंकाल मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। जंगल से गुजर रहे ग्रामीणों की नजर कंकाल पर पड़ी, जिसके बाद पुलिस और वन विभाग को सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही पुलिस, वन विभाग और पटवारी टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल की स्थिति से यह स्पष्ट हो गया कि शव काफी पुराना है और लंबे समय से जंगली क्षेत्र में पड़ा हुआ था। प्रारंभिक जांच में कंकाल की पहचान दो माह से लापता गोविंद लाल (55) के रूप में हुई है।

पर्चे से हुई शिनाख्त, बागेश्वर में तलाश रहा था परिवार

जांच के दौरान घटनास्थल से एक पर्चा बरामद हुआ, जिस पर दो मोबाइल नंबर लिखे थे। इनमें से एक नंबर पर संपर्क करने पर मृतक की पहचान गोविंद लाल पुत्र दीवान राम, निवासी काफलीगैर, थाना झिरौली, जनपद बागेश्वर के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार गोविंद लाल बीते करीब दो महीनों से लापता थे और उनकी गुमशुदगी 30 अक्टूबर को थाना झिरौली में दर्ज कराई गई थी। परिवार बागेश्वर क्षेत्र में लगातार उनकी तलाश कर रहा था।

कंकाल की स्थिति से कई सवाल

मौके पर मिले कंकाल के एक पैर में जूता और मौजा था, जबकि दूसरे पैर में केवल मौजा मिला। कंकाल की हड्डियां जांघ तक सुरक्षित पाई गईं, जबकि शरीर की अन्य हड्डियां आसपास बिखरी हुई थीं। घटनास्थल से पेंट, बेल्ट और बनियान भी बरामद की गई है। इससे संकेत मिलता है कि शव लंबे समय से जंगल में पड़ा रहा और समय के साथ प्राकृतिक या बाहरी कारणों से क्षत-विक्षत हो गया।बताया जा रहा है कि आंशिक कंकाल सिनोली गांव से करीब छह से सात किलोमीटर दूर पटवारी क्षेत्र के जंगल में मिला है।

ग्रामीणों ने जताई गुलदार हमले की आशंका

स्थानीय ग्रामीणों ने मामले में गुलदार के हमले की आशंका जताई है। ग्रामीणों के अनुसार घटनास्थल के आसपास गुलदार की बीट और पंजों के निशान भी देखे गए हैं। कंकाल की स्थिति को देखते हुए आशंका है कि शव को जंगली जानवरों ने नुकसान पहुंचाया हो, हालांकि इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस-वन विभाग की संयुक्त जांच जारी

मौके पर ताकुला चौकी प्रभारी राजेंद्र बिष्ट और सिविल सोयम वन प्रभाग के रेंजर मनोज सनवाल टीम के साथ जांच में जुटे रहे। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला हार्ट अटैक या जंगली जानवर के हमले से जुड़ा हो सकता है।

सिविल सोयम वन प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी प्रदीप धौलाखंडी ने बताया कि फिलहाल गुलदार या किसी अन्य वन्यजीव के हमले की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त जांच पूरी होने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

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