बड़ी कामयाबी: मंगलवार रात पनियाली के जंगलों में डॉ. दुष्यंत की टीम ने दबोचा; पिंजरे के पास आते ही दागी गई डोज
हल्द्वानी/रामनगर।रामनगर वन प्रभाग की फतेहपुर रेंज में पिछले 20 दिनों से ‘आतंक का पर्याय’ बने बाघ को आखिरकार वन विभाग की टीम ने मंगलवार रात ट्रेंकुलाइज कर लिया। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा के नेतृत्व में चली इस चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू मुहिम के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, विभाग ने अभी भी क्षेत्र में अन्य बाघों की मौजूदगी की आशंका जताते हुए अलर्ट जारी रखा है।
आधी रात को चला ‘ऑपरेशन पनियाली’
मंगलवार रात रेस्क्यू टीम बंद वाहनों में बैठकर पनियाली क्षेत्र के जंगलों में बाघ की मूवमेंट पर नजर रखे हुए थी। जैसे ही करीब साढ़े तीन साल का यह नर बाघ वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे के करीब पहुंचा, सतर्क टीम ने बिना मौका गंवाए उसे ट्रेंकुलाइज कर दिया। बेहोश होने के बाद बाघ को सुरक्षित रेस्क्यू कर ढेला रेंज स्थित रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है।
15 दिन, दो मौतें और भारी आक्रोश
इस बाघ ने पखवाड़े भर के भीतर इलाके में खूनी तांडव मचा रखा था:
- 12 फरवरी: पीपलपोखरा गांव की गंगा देवी को जंगल में घास काटते समय शिकार बनाया।
- 25 फरवरी: पनियाली की कमला फर्त्याल पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया।
इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर था और वन विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन भी हुए थे। दबाव और खतरे को देखते हुए विभाग ने दो टीमें तैनात की थीं।
”पकड़ा गया नर बाघ करीब 3.5 साल का है। उसे फिलहाल ढेला रेंज भेजा गया है। जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि यही बाघ आदमखोर है या नहीं। ग्रामीणों से अपील है कि वे अभी अकेले जंगल की ओर न जाएं और पूरी सतर्कता बरतें।”
— ध्रुप सिंह मर्तोलिया, डीएफओ
खतरा अभी टला नहीं!
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि भले ही एक बाघ पकड़ लिया गया हो, लेकिन जंगल में अन्य बाघों की सक्रियता से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि वे समूह में ही बाहर निकलें और शाम ढलने के बाद पनियाली व आसपास के जंगलों की ओर रुख न करें।
