मध्य-पूर्व में महायुद्ध की आहट: ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमला, इंकलाबी मजदूर केंद्र ने किया साम्राज्यवादी आक्रामकता का पुरजोर विरोध

ईरान की जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी युद्धपोत ‘अब्राहम लिंकन’ पर मिसाइल हमला, तेल संकट गहराने की आशंका

नई दिल्ली।ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले के बाद मध्य-पूर्व का संकट अब एक विनाशकारी युद्ध का रूप ले चुका है। इस साम्राज्यवादी हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों की शहादत की खबरें हैं। हमलों की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इजरायली बमबारी में एक स्कूल को निशाना बनाया गया, जिसमें 50 से अधिक बच्चियों की मौत हो गई है।

ईरान का पलटवार: अमेरिकी युद्धपोत और लड़ाकू विमानों को बनाया निशाना

इस हमले के जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए मध्य-पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलें दागी हैं। खबरों के मुताबिक, अमेरिकी युद्धपोत “अब्राहम लिंकन” को निशाना बनाया गया है और अमेरिका के कई F-15 लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा किया जा रहा है। ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होरमुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना पैदा हो गई है।

अमेरिका का असली मकसद तेल और प्रभुत्व: इंकलाबी मजदूर केंद्र

‘इंकलाबी मजदूर केंद्र’ ने एक बयान जारी कर इस हमले की कड़ी भर्त्सना की है। संगठन का कहना है कि परमाणु हथियारों के नाम पर ट्रंप प्रशासन दुनिया को गुमराह कर रहा है। असल में, अमेरिका इस तेल संपन्न क्षेत्र से रूसी और चीनी प्रभाव को खत्म कर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना चाहता है। बयान में कहा गया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के अपहरण के बाद अब ईरान पर यह हमला अमेरिकी हताशा और दुनिया पर अपनी धौंस बनाए रखने की कोशिश का हिस्सा है।

भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल

संगठन ने प्रधानमंत्री मोदी की इस मुद्दे पर चुप्पी को “शर्मनाक” और “अमेरिकापरस्ती” करार दिया है। इंकलाबी मजदूर केंद्र ने मांग की है कि:

  • ​भारत सरकार ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन का तत्काल विरोध करे।
  • ​अंतर्राष्ट्रीय कानूनों को ताक पर रखकर किए जा रहे इस नरसंहार को रुकवाने के लिए कदम उठाए।
  • ​भारत की मेहनतकश जनता, छात्र और युवा इस साम्राज्यवादी गठजोड़ (अमेरिका-इजराइल) के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएं।

“साम्राज्यवाद एक डाकेजनी की व्यवस्था है और जब तक यह व्यवस्था रहेगी, निर्दोषों का कत्लेआम नहीं थमेगा। आज दुनिया भर के मजदूरों और न्यायप्रिय लोगों को इस मानवद्रोही व्यवस्था के खिलाफ क्रांतिकारी संघर्ष तेज करने की जरूरत है।”

प्रवक्ता, इंकलाबी मजदूर केंद्र

युद्ध की इस आग ने तेल अवीव सहित इजराइल के कई शहरों में हड़कंप मचा दिया है, जबकि रूस और चीन फिलहाल औपचारिक विरोध जताते हुए पर्दे के पीछे से ईरान की मदद कर रहे हैं। आने वाले दिन विश्व शांति और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।

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