रामनगर। अमेरिका-इसराइल गठजोड़ द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों के विरोध में आज रामनगर की सड़कें नारों से गूंज उठीं। विभिन्न जनसंगठनों के कार्यकर्ताओं ने ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन और मासूमों के कत्लेआम के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का पुतला दहन किया।

“एशिया की धरती पर खुदेगी साम्राज्यवाद की कब्र”
प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “साम्राज्यवाद तेरी कब्र खुदेगी एशिया की धरती पर”, “मासूम बच्चों की हत्या बंद करो” और “ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं” जैसे तीखे नारे लगाए। वक्ताओं ने वियतनाम युद्ध का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह वियतनाम ने साम्राज्यवाद को धूल चटाई थी, उसी तरह आज का संघर्ष भी इतिहास रचेगा।
मानवीयता को ताक पर रख हो रही बमबारी
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों को धता बताकर स्कूलों, अस्पतालों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है। एक स्कूल पर हुई बमबारी में 150 से अधिक मासूम बच्चियों की हत्या को वक्ताओं ने आधुनिक युग का सबसे वीभत्स अपराध बताया। आरोप लगाया गया कि मध्य-पूर्व के तेल और गैस संसाधनों पर कब्जे की नीयत से अमेरिका और इसराइल पूरी दुनिया को युद्ध की आग में झोंक रहे हैं।
केंद्र सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल
प्रदर्शनकारियों ने भारत सरकार के रुख पर भी कड़ा प्रहार किया। वक्ताओं ने कहा, “एक तरफ दुनिया इन नरसंहारों की निंदा कर रही है, वहीं भारत सरकार ने ईरान पर हमले के विरुद्ध अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इस संवेदनशील मसले पर प्रधानमंत्री की चुप्पी शर्मनाक है।” वक्ताओं ने वेनेजुएला के पूर्व घटनाक्रमों का उदाहरण देते हुए अमेरिकी दखलंदाजी को विश्व शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया।
इन संगठनों की रही सक्रिय भागीदारी
विरोध-प्रदर्शन में मुख्य रूप से निम्नलिखित संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे:
- इंकलाबी मज़दूर केंद्र: रोहित रुहेला, भुवन चंद्र।
- प्रगतिशील महिला एकता केंद्र: तुलसी छिंवाल, गीता देवी, प्रभा देवी।
- महिला एकता मंच: ललिता रावत।
- उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी: प्रभात ध्यानी, मो. आसिफ।
- परिवर्तनकामी छात्र संगठन: रवि, बबली।
- साइंस फॉर सोसाइटी: गिरीश आर्य।
