रामनगर। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला एकता मंच ने क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान छेड़ते हुए हुंकार भरी है। मंच ने आगामी 8 मार्च को वन ग्राम पूछड़ी और 11 मार्च को मालधन चंद्रनगर में विशाल सभाएं आयोजित करने का निर्णय लिया है। बैठकों के दौरान महिलाओं ने न केवल अपने अधिकारों पर चर्चा की, बल्कि वैश्विक स्तर पर थोपे जा रहे युद्धों और बढ़ती महंगाई के खिलाफ भी कड़ा रोष व्यक्त किया।

युद्ध और महंगाई के खिलाफ ‘प्रतिरोध’ का दिन
कालूसिद्ध गांव में आयोजित जनसंपर्क बैठक को संबोधित करते हुए सरस्वती जोशी ने अमेरिका और इजरायल की साम्राज्यवादी नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि “आज दुनिया पर आधिपत्य स्थापित करने के लिए युद्ध थोपे जा रहे हैं, जिसमें निर्दोष छात्राओं और आम नागरिकों की बलि दी जा रही है। इन युद्धों के कारण ही कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर भारत में बढ़ती महंगाई के रूप में दिख रहा है।” उन्होंने आह्वान किया कि इस बार 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को ‘युद्ध विरोधी दिवस’ के रूप में मनाया जाए।
पूंजीवादी लूट है तबाही की जड़: कौशल्या
बैठक में कौशल्या ने स्पष्ट किया कि युद्ध की सबसे बड़ी त्रासदी महिलाओं और बच्चों को झेलनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि जब तक दुनिया से पूंजीवादी और साम्राज्यवादी लूट का खात्मा नहीं होगा, तब तक शांति स्थापित होना असंभव है। वहीं, धना तिवारी ने महिलाओं से एकजुटता की अपील करते हुए कहा कि यह दिन महिलाओं के साझा सुख-दुख बांटने और भविष्य की सामूहिक रणनीति तैयार करने का मंच है।
रामलीला परिसर में जुटेगा महिलाओं का हुजूम
मंच की कार्यकर्ता शांति मेहरा ने क्षेत्र की जनता को आमंत्रित करते हुए बताया कि:
- मुख्य कार्यक्रम: 8 मार्च (रविवार)
- समय: प्रातः 11:00 बजे
- स्थान: रामलीला परिसर
बैठक में इनकी रही उपस्थिति:
इस दौरान शांति मेहरा, दीपा ध्यानी, ममता, धर्मा, दुर्गा, गीता, मनी, श्यामा, लीला, हंसी देवी, पुष्पा, कमला, बचुली, आशा और भागुली सहित बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
विशेष नोट: महिला एकता मंच ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन केवल अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था परिवर्तन और शांतिपूर्ण विश्व की स्थापना के लिए एक वैचारिक लड़ाई है।
