प्रशासनिक विफलता पर कांग्रेस का हल्ला बोल: उत्तरकाशी में जनता का आक्रोश और तालाबंदी की चेतावनी।

उत्तरकाशी।उत्तराखंड के सीमांत जनपद उत्तरकाशी में प्रशासनिक विफलता और सरकारी मशीनरी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। मंगलवार को जिला मुख्यालय पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रशासनिक विफलता के विरुद्ध हल्ला बोल कार्यक्रम के तहत कलक्ट्रेट का घेराव किया। जनता की समस्याओं की अनदेखी से उपजे जनता का आक्रोश को स्वर देते हुए पार्टी ने अपर जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को ज्ञापन प्रेषित किया।

अधिकारियों की अनुपस्थिति और आमजन की पीड़ा

कांग्रेस की मुख्य आपत्ति जिले की तहसीलों और उप-तहसीलों में अधिकारियों की गैर-मौजूदगी को लेकर है। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वर्तमान में उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) और तहसीलदार जैसे महत्वपूर्ण पदों पर आसीन अधिकारी नियमित रूप से कार्यालयों में उपस्थित नहीं रहते हैं। इस प्रशासनिक विफलता के कारण राजस्व संबंधी कार्य ठप पड़े हैं। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से मिलों का सफर तय कर मुख्यालय पहुंचने वाले निर्धन ग्रामीणों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। अधिकारियों की कुर्सी खाली रहने से न केवल विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि आम आदमी का सरकारी व्यवस्था से भरोसा भी उठ रहा है।

खंडहर बनती पटवारी चौकियां और चरमराती कानून व्यवस्था

कांग्रेस ने ग्रामीण स्तर पर प्रशासन की रीढ़ कही जाने वाली पटवारी चौकियों की दुर्दशा पर गंभीर चिंता जताई है। जनपद में पटवारी चौकियां रखरखाव के अभाव में खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। यह प्रशासनिक विफलता का ही परिणाम है कि पटवारियों की अपने कार्यस्थलों पर तैनाती केवल कागजों तक सीमित रह गई है। जब बुनियादी स्तर पर ही सरकारी नुमाइंदे उपलब्ध नहीं होंगे, तो ग्रामीणों को जाति, आय और निवास जैसे महत्वपूर्ण प्रमाण पत्रों के लिए दर-दर भटकना ही पड़ेगा। जनता का आक्रोश इस बात पर भी है कि सरकार और प्रशासन इन चौकियों के पुनरुद्धार के लिए कोई ठोस नीति नहीं बना पा रहे हैं।

भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का आरोप

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने प्रदेश सरकार की नीतियों की कटु आलोचना की। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान सत्तासीन दल जनसेवा के अपने मूल संकल्प से भटक चुका है। सरकार का पूरा तंत्र केवल ‘कमीशनखोरी’ के मकड़जाल में उलझा हुआ है। जब विकास के नाम पर भ्रष्टाचार हावी हो जाता है, तो स्वाभाविक रूप से प्रशासनिक विफलता जन्म लेती है। कांग्रेस ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि समय रहते अधिकारियों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ, तो यह हल्ला बोल आंदोलन केवल ज्ञापन तक सीमित नहीं रहेगा।

आगामी रणनीति और तालाबंदी की चेतावनी

कांग्रेस ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि तहसीलों में अधिकारियों की दैनिक उपस्थिति सुनिश्चित नहीं की गई और पटवारी चौकियों को सक्रिय नहीं किया गया, तो पूरी जनपद में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा। पार्टी ने तहसील परिसरों और बंद पड़ी चौकियों पर तालाबंदी करने की स्पष्ट चेतावनी दी है। यह आंदोलन सीधे तौर पर जनता का आक्रोश बनकर उभरेगा जिसकी जिम्मेदारी शासन की होगी।

​इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया में विजेंद्र नौटियाल, कनकपाल सिंह परमार (पूर्व प्रमुख, डुंडा), नवीन भंडारी, पपेंद्र नेगी, सूर्यबल्लभ नौटियाल, विपिन नौटियाल, कविता जोगेला, एकादशी, राखी राणा, सुधीश पंवार, भगवान चंद्र, रमन कटैथ, सुनील रावत और प्रकाश सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। प्रशासनिक विफलता के विरुद्ध यह हल्ला बोल आने वाले समय में उत्तरकाशी की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

रिपोर्ट: कीर्ति निधि सजवान, उत्तरकाशी।

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