हल्द्वानी/नैनीताल। देवभूमि उत्तराखंड के शांत पर्वतीय अंचलों में एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की रूह कँपा देने वाली घटना सामने आई है। नैनीताल जनपद के अंतर्गत आने वाले सूर्यागांव में गुलदार का हमला (Leopard Attack) इतना घातक रहा कि एक महिला को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस हृदयविदारक घटना ने न केवल स्थानीय ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि समूचे क्षेत्र में दहशत का माहौल व्याप्त है।
घटना का विवरण: घास काटने गई महिला बनी निवाला
प्राप्त विवरण के अनुसार, सूर्यागांव निवासी हंसी देवी (45 वर्ष), पत्नी लाल सिंह सूर्या, अन्य दिनों की भांति शुक्रवार दोपहर को अपने मवेशियों के लिए घास काटने पास के जंगल में गई थीं। जैसे ही वह जंगल के घने हिस्से में पहुँचीं, घात लगाकर बैठे गुलदार ने उन पर अचानक हमला कर दिया।
शाम ढलने तक जब हंसी देवी अपने घर नहीं लौटीं, तो परिजनों की चिंता बढ़ गई। अनिष्ट की आशंका के चलते ग्रामीणों और परिजनों ने जंगल की ओर रुख किया। घंटों की मशक्कत और खोजबीन के बाद, जंगल के एक निर्जन हिस्से में हंसी देवी का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। शव की स्थिति को देखकर यह स्पष्ट था कि गुलदार के हमले (Guldar Attack) में उनकी मौत हुई है। इस घटना के बाद से गांव की महिलाओं और बच्चों में भारी खौफ है और लोग अपने घरों से निकलने में कतरा रहे हैं।
सांसद अजय भट्ट ने जताया शोक, प्रशासन को फटकारा
घटना की सूचना मिलते ही पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री एवं नैनीताल-उधमसिंह नगर सांसद अजय भट्ट (MP Ajay Bhatt) ने गहरा शोक प्रकट किया। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए इसे एक अपूरणीय क्षति बताया। अजय भट्ट ने तत्काल मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी (DM) और प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) से दूरभाष पर वार्ता की।
सांसद ने वन विभाग (Forest Department Action) की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि क्षेत्र में तत्काल पिंजरा लगाया जाए ताकि आदमखोर हो चुके गुलदार को पकड़ा जा सके। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
प्रमुख निर्देश और मुआवजे की मांग
सांसद ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर त्वरित कार्रवाई की मांग की है:
- पिंजरा और गश्त: सूर्यागांव और आसपास के क्षेत्रों में वन विभाग की गश्त बढ़ाई जाए और शिकारी गुलदार को पकड़ने के लिए आधुनिक उपकरणों का सहयोग लिया जाए।
- शीघ्र मुआवजा: पीड़ित परिवार को सरकार और वन विभाग की ओर से मिलने वाली आर्थिक सहायता अविलंब प्रदान की जाए ताकि उन्हें इस कठिन समय में कुछ संबल मिल सके।
- जागरूकता अभियान: सीमावर्ती गांवों में ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए सूचना तंत्र मजबूत किया जाए।
उत्तराखंड में बढ़ता वन्यजीव संघर्ष
यह उत्तराखंड वन्यजीव संघर्ष (Uttarakhand Wildlife Conflict) की कोई पहली घटना नहीं है। नैनीताल और हल्द्वानी के पर्वतीय क्षेत्रों में पिछले कुछ महीनों में जंगली जानवरों के हमलों में तेजी आई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन और विभाग केवल घटनाओं के बाद जागते हैं, जबकि ठोस सुरक्षा रणनीति का अभाव है। सूर्यागांव समाचार (Suryagaon News) के माध्यम से ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक गुलदार पकड़ा नहीं जाता, तब तक वन कर्मियों की तैनाती गांव के पास सुनिश्चित की जाए।
वर्तमान में, हंसी देवी की मृत्यु से गांव में मातम पसरा हुआ है। पुलिस और वन विभाग ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन सांसद के निर्देशों पर कितनी सक्रियता से अमल करता है और भयभीत ग्रामीणों को कब तक इस खूंखार गुलदार से निजात मिलती है।
