देहरादून में सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास पर बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन पर आधारित फिल्म के प्रोमो और पोस्टर का लोकार्पण किया। यह आयोजन आध्यात्मिकता, संस्कृति और भारतीय मूल्यों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान फिल्म से जुड़े कलाकार, निर्देशक और कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह फिल्म केवल एक मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला एक सशक्त प्रयास है। उन्होंने कहा कि बाबा नीब करौरी महाराज का जीवन त्याग, सेवा और भक्ति का अद्वितीय उदाहरण है, जो आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित कर रहा है। उनकी शिक्षाएं सरल जीवन, करुणा, निस्वार्थ सेवा और ईश्वर के प्रति अटूट आस्था का संदेश देती हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब समाज कई चुनौतियों से गुजर रहा है, ऐसे में इस प्रकार की आध्यात्मिक फिल्मों की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। इस तरह की फिल्में लोगों को अपने मूल्यों और संस्कृति से जोड़ने का कार्य करती हैं और नई पीढ़ी को सही दिशा दिखाने में मददगार साबित होती हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराएं विश्व में अपनी अलग पहचान रखती हैं। इन मूल्यों के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए इस तरह के प्रयास बेहद जरूरी हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह फिल्म समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगी और लोगों के भीतर आध्यात्मिक चेतना को जागृत करेगी।
कार्यक्रम के दौरान मौजूद योगगुरु स्वामी रामदेव और स्वामी चिदानंद सरस्वती ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि बाबा नीब करौरी महाराज जैसे संतों का जीवन समाज को सच्चाई, सेवा और प्रेम का मार्ग दिखाता है। ऐसी फिल्में लोगों को आध्यात्मिकता के करीब लाने का एक प्रभावी माध्यम बन सकती हैं।
फिल्म के निर्देशक शरद सिंह ठाकुर ने बताया कि इस फिल्म को बनाने का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन दर्शन को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि फिल्म में बाबा के जीवन से जुड़े कई प्रेरणादायक प्रसंगों को शामिल किया गया है, जिससे दर्शकों को उनके व्यक्तित्व और विचारों को समझने में मदद मिलेगी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों और निर्माता-निर्देशक टीम को बधाई देते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और देश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में जब युवा पीढ़ी तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रही है, ऐसे में इस तरह की फिल्मों का निर्माण उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बन सकता है। यह फिल्म न केवल आध्यात्मिकता का संदेश देगी, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई को भी दर्शाएगी।

कुल मिलाकर, बाबा नीब करौरी महाराज पर आधारित यह फिल्म आने वाले समय में दर्शकों के बीच खास पहचान बना सकती है। इसके माध्यम से न केवल एक महान संत के जीवन को समझने का अवसर मिलेगा, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक जागरूकता को भी बढ़ावा मिलेगा।
