देहरादून: देवभूमि में सुरक्षा तंत्र की बड़ी कामयाबी
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने और बाहरी व संदिग्ध तत्वों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन क्रैकडाउन’ के तहत रायपुर पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) देहरादून के सख्त निर्देशों के बाद पूरे जिले में चलाए जा रहे सघन चेकिंग और सत्यापन अभियान के दौरान पुलिस ने एक बहुराष्ट्रीय संदिग्ध नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन विदेशी महिलाओं को गिरफ्तार किया है। ये महिलाएं भारतीय पहचान पत्रों के फर्जीवाड़े के सहारे अवैध रूप से राजधानी के पॉश इलाके में निवास कर रही थीं।
साईं कॉम्प्लेक्स में पुलिस का छापा और गिरफ्तारी
घटनाक्रम के अनुसार, दिनांक 28 मार्च 2026 को रायपुर पुलिस की टीम जब क्षेत्र में बाहरी व्यक्तियों के सत्यापन हेतु निकली थी, तभी मुखबिर और स्थानीय इनपुट के आधार पर ‘साईं कॉम्प्लेक्स’ के तृतीय तल पर स्थित एक फ्लैट में दबिश दी गई। वहाँ तीन विदेशी महिलाएं अत्यंत संदिग्ध परिस्थितियों में रहती पाई गईं। जब पुलिस ने उनसे भारत में रहने के वैध यात्रा दस्तावेज (Visa/Passport) मांगे, तो वे कोई भी पुख्ता प्रमाण प्रस्तुत करने में पूरी तरह असमर्थ रहीं।
हिरासत में लेकर की गई गहन पूछताछ में महिलाओं की पहचान इस प्रकार हुई:
- ईरीका (29 वर्ष): मूल निवासी किर्गिस्तान।
- करीना (30 वर्ष): मूल निवासी उज्बेकिस्तान।
- निगोरा नीम (32 वर्ष): मूल निवासी उज्बेकिस्तान।
फर्जी पहचान पत्रों का जाल और बरामदगी
तलाशी के दौरान पुलिस के भी होश उड़ गए जब इन विदेशी महिलाओं के पास से भारतीय नागरिकों जैसे दस्तावेज बरामद हुए। पुलिस ने इनके कब्जे से 01 किर्गिस्तान पासपोर्ट, 03 फर्जी आधार कार्ड, 02 पैन कार्ड, 01 किर्गिज आई-कार्ड, एसबीआई बैंक की पासबुक, 07 मोबाइल फोन और 05 विदेशी मुद्रा के नोट बरामद किए हैं। यह स्पष्ट है कि इन महिलाओं ने भारतीय व्यवस्था में सेंध लगाने के लिए सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए थे।
पूछताछ में हुए चौंकाने वाले खुलासे
पुलिसिया पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि मुख्य अभियुक्ता ईरीका वर्ष 2023 में एक वर्ष के वैध ई-वीजा पर भारत आई थी, लेकिन वीजा अवधि समाप्त होने के बावजूद वह वतन वापस नहीं गई और अवैध रूप से यहीं छिपकर रहने लगी। वहीं, करीना और निगोरा नीम ने और भी गंभीर अपराध किया है; ये दोनों नेपाल बॉर्डर के दुर्गम रास्तों से अवैध अप्रवासी के रूप में भारत में दाखिल हुईं।
हैरत की बात यह है कि निगोरा नीम पहले भी बिहार पुलिस द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर गिरफ्तार कर जेल भेजी जा चुकी है। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने अपने देश लौटने के बजाय फिर से अपराध का रास्ता चुना। ये तीनों दिल्ली में एक सिंडिकेट के माध्यम से मिलीं और पिछले 6-7 महीनों से देहरादून के अलग-अलग हिस्सों में अपनी पहचान बदलकर रह रही थीं।
कठोर कानूनी कार्रवाई
रायपुर थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीनों महिला अभियुक्ताओं के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) एवं द इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 (The Immigration & Foreigners Act 2025) की धारा 23 के तहत मुकदमा पंजीकृत कर उन्हें जेल भेज दिया है।
”देहरादून पुलिस किसी भी संदिग्ध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी। ऑपरेशन क्रैकडाउन का उद्देश्य शहर की सुरक्षा को अभेद्य बनाना है। हम उन लोगों की भी तलाश कर रहे हैं जिन्होंने इन विदेशी महिलाओं को फर्जी दस्तावेज बनाने में मदद की है। जल्द ही इस रैकेट से जुड़े स्थानीय एजेंटों को भी सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।”
— वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, देहरादून
यह कार्रवाई न केवल रायपुर पुलिस की सतर्कता को दर्शाती है, बल्कि उन संदिग्ध तत्वों के लिए भी एक कड़ी चेतावनी है जो देवभूमि की शांति भंग करने या अवैध रूप से यहाँ निवास करने का दुस्साहस कर रहे हैं। फिलहाल, पुलिस इन महिलाओं के मोबाइल रिकॉर्ड्स खंगाल रही है ताकि उनके संपर्कों और भविष्य की संभावित साजिशों का पता लगाया जा सके।
