विकास और विरासत का स्वर्णिम अध्याय: उत्तराखंड ने निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और सुशासन से रचा नया इतिहास

देहरादून। हिमालय की गोद में बसा उत्तराखंड आज अपनी पारंपरिक पहचान के साथ-साथ आधुनिक विकास के वैश्विक मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में राज्य ने ‘विकास भी, विरासत भी’ के मूल मंत्र को चरितार्थ करते हुए पिछले चार वर्षों में प्रगति के ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जो आने वाले दशकों के लिए एक मजबूत नींव सिद्ध होंगे। आज उत्तराखंड केवल आध्यात्मिक शांति का केंद्र नहीं, बल्कि निवेश की उड़ान और इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति का जीवंत उदाहरण बन चुका है।

आर्थिक सशक्तिकरण और औद्योगिक क्रांति

​राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए आयोजित ‘ग्लोबल इन्वेस्टर समिट’ उत्तराखंड के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई है। इस दौरान ₹3.56 लाख करोड़ के ऐतिहासिक एमओयू (MoU) साइन किए गए, जिनमें से ₹1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि निवेशकों का भरोसा देवभूमि का कायाकल्प करने वाली नीतियों पर अडिग है। ऊधमसिंह नगर के खुरपिया फार्म में स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप की स्वीकृति और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में “Achievers” श्रेणी प्राप्त करना राज्य की औद्योगिक दूरदर्शिता का प्रमाण है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी का नया जाल

​उत्तराखंड की भौगोलिक चुनौतियों को अवसरों में बदलते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति को नई दिशा दी गई है। जमरानी बांध परियोजना और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन जैसे महाप्रोजेक्ट्स पर कार्य युद्धस्तर पर जारी है। दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड के शुरू होने से राष्ट्रीय राजधानी से कनेक्टिविटी सुगम होगी। वहीं, ‘उड़ान योजना’ के माध्यम से दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों को हेली सेवाओं से जोड़कर पर्यटन और आपातकालीन चिकित्सा को मजबूती दी गई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में किच्छा में बन रहा एम्स सैटलाइट सेंटर पूरे कुमाऊं मंडल के लिए वरदान साबित होगा।

विरासत का संरक्षण और शैक्षिक नवाचार

​’विकास भी, विरासत भी’ के संकल्प के तहत उत्तराखंड राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना। सांस्कृतिक जड़ों को सींचने के लिए दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना और पाठ्यक्रम में श्रीमद् भगवद् गीता का समावेश एक क्रांतिकारी कदम है। इसके साथ ही, 13 जिलों में ‘आदर्श संस्कृत ग्राम’ की परकल्पना राज्य की प्राचीन भाषा और संस्कृति के पुनरुद्धार का माध्यम बन रही है।

पर्यटन और ऊर्जा: वैश्विक पहचान

उत्तराखंड विकास की कहानी पर्यटन के बिना अधूरी है। वर्ष 2025 में 6.03 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन और चार धाम यात्रा में 48 लाख श्रद्धालुओं की भागीदारी ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई दी है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में 1 गीगावाट की क्षमता हासिल करना और 42,000 सोलर रूफटॉप संयंत्रों की स्थापना यह बताती है कि राज्य आत्मनिर्भर उत्तराखंड के लक्ष्य की ओर अग्रसर है।

राष्ट्रीय मंच पर गौरवशाली प्रदर्शन

​नीति आयोग के ‘निर्यात तैयारी सूचकांक 2024’ में छोटे राज्यों की श्रेणी में प्रथम स्थान और ‘एसडीजी इंडेक्स 2023-24’ में देश भर में शीर्ष स्थान प्राप्त करना शासन की कार्यकुशलता को दर्शाता है। स्टार्टअप रैंकिंग में “Leaders” श्रेणी और विंग्स इंडिया 2026 में सर्वश्रेष्ठ विमानन पारिस्थितिकी तंत्र का पुरस्कार मिलना यह सिद्ध करता है कि उत्तराखंड अब बड़े राज्यों को हर मोर्चे पर कड़ी टक्कर दे रहा है।

सीमांत क्षेत्रों का उदय

​’वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के माध्यम से सीमांत गांवों का भाग्य बदला जा रहा है। ₹270 करोड़ की लागत से संचालित योजनाएं पलायन रोकने और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने में सहायक हो रही हैं। जखोल, सूपी और हर्षिल जैसे गांवों को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम का पुरस्कार मिलना ग्रामीण सशक्तिकरण की नई गाथा लिख रहा है।

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