रामनगर में आक्रोश: युद्ध की विभीषिका और बढ़ती महंगाई के खिलाफ संयुक्त संघर्ष समिति का हल्लाबोल
आज उत्तराखंड के रामनगर की फिजाओं में साम्राज्यवाद विरोधी नारों और विश्व शांति की अपील गूंजती रही। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर थोपे गए युद्ध, मासूमों के कत्लेआम और इसके चलते उत्पन्न हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के विरोध में संयुक्त संघर्ष समिति से जुड़े विभिन्न संगठनों ने तहसील परिसर में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। राजकीय अवकाश होने के बावजूद, आंदोलनकारियों का जज्बा कम नहीं हुआ और उन्होंने उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान के आवास पर जाकर देश के प्रधानमंत्री, पेट्रोलियम मंत्री और विदेश मंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

युद्ध की आग और मानवता का क्रंदन
प्रदर्शनकारियों ने अत्यंत तीखे स्वर में अमेरिका-इजरायल गठबंधन की आलोचना की। वक्ताओं ने कहा कि ईरान पर थोपा गया यह युद्ध न केवल दो देशों के बीच का संघर्ष है, बल्कि यह पूरी मानवता पर हमला है। युद्ध की विभीषिका में मासूम बच्चों और निर्दोष नागरिकों की बलि दी जा रही है, जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है। “साम्राज्यवाद का नाश हो” और “हमें युद्ध नहीं, शांति चाहिए” जैसे नारों के साथ प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वैश्विक शक्तियों की विस्तारवादी नीति आज दुनिया को विनाश की कगार पर ले आई है।
ईंधन संकट: रसोई से लेकर रोजगार तक हाहाकार
ज्ञापन में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई कि युद्ध के कारण समुद्री मार्ग बाधित होने से भारत में तेल और गैस की भारी किल्लत हो गई है। संयुक्त संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि संसद में पेट्रोलियम मंत्री के आश्वासनों के विपरीत, जमीनी स्तर पर कुकिंग गैस की आपूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है।
- नियमों का जाल: गैस बुकिंग और डिलीवरी के नए पेचीदा नियमों ने आम जनता की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। हफ्तों पहले की गई बुकिंग के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं, जिससे गैस एजेंसियों पर भारी बैकलाग जमा हो गया है।
- रोजगार पर संकट: व्यावसायिक गैस की बिक्री पर लगे प्रतिबंध ने सूक्ष्म उद्योगों, ढाबों, हॉस्टलों और कैंटीनों के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है। लाखों श्रमिक आज बेरोजगार होने की कगार पर हैं, जिससे उनके सामने ‘दो वक्त की रोटी’ का सवाल खड़ा हो गया है।
प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा: करोड़ों परिवारों की बढ़ती धड़कनें
समिति ने विदेश मंत्रालय का ध्यान खाड़ी देशों में फंसे लगभग एक करोड़ प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा की ओर आकर्षित किया। युद्ध क्षेत्र के निकट होने के कारण इन भारतीयों के परिजन भारत में अत्यंत चिंतित और भयभीत हैं। ज्ञापन में मांग की गई कि सरकार ‘विशेष रेस्क्यू अभियान’ चलाकर खाड़ी देशों में फंसे नागरिकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित करे।

प्रमुख मांगें और नेतृत्व
संयुक्त संघर्ष समिति ने सरकार के सम्मुख निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
- व्यावसायिक गैस की बिक्री से तत्काल प्रतिबंध हटाया जाए।
- गैस की बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेकर आपूर्ति बहाल की जाए।
- संकट काल में बेरोजगार हुए श्रमिकों को सम्मानजनक वित्तीय सहायता प्रदान की जाए।
- युद्ध विराम के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत निर्णायक भूमिका निभाए।
इस ऐतिहासिक प्रदर्शन में संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी, समाजवादी लोक मंच के मुनीष कुमार, इंकलाबी मज़दूर केंद्र के रोहित रुहेला, और महिला एकता मंच की कौशल्या चुन्याल सहित भारी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शिरकत की। देवभूमि व्यापार मंडल के संरक्षक मनमोहन अग्रवाल और विभिन्न छात्र संगठनों (आइसा, पछास) के प्रतिनिधियों ने भी इस आंदोलन को अपना पुरजोर समर्थन दिया।
