- सीएम धामी ने हरिद्वार में सद्भावना सम्मेलन से सामाजिक एकता का दिया संदेश
- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को बताया भारत की पहचान
- वैश्विक स्तर पर भारत की मानवता आधारित भूमिका का उल्लेख
- समान नागरिक संहिता को सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया
- उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु सरकार प्रतिबद्ध
- चारधाम और धार्मिक कॉरिडोर विकास कार्यों को बताया प्राथमिकता
हरिद्वार। पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार के ऋषिकुल मैदान में आयोजित “मानव सेवा एवं उत्थान समिति” के सद्भावना सम्मेलन एवं बैसाखी महोत्सव 2026 में प्रतिभाग करते हुए कहा कि भारत की सनातन संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के सिद्धांत पर आधारित है, जो पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संचार करते हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने देशभर से आए संतों, अतिथियों, महिलाओं, युवाओं और प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा बैसाखी पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक और सामाजिक चेतना से जुड़े इस प्रकार के आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री ने सतपाल महाराज के मार्गदर्शन में “मानव सेवा एवं उत्थान समिति” द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था समाज में समरसता, सेवा और नैतिक जागरण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब विश्व विभिन्न चुनौतियों और तनावों से गुजर रहा है, तब प्रेम, सद्भाव और मानवता का संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने हमेशा वैश्विक स्तर पर मानवता की सेवा को प्राथमिकता दी है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘एक पृथ्वी-एक परिवार-एक भविष्य’ के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कोरोना काल के दौरान कई देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने, योग और आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाने और आपदा के समय सहायता पहुंचाने जैसे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत की मानवीय सोच को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द किसी भी राष्ट्र की प्रगति के मूल आधार होते हैं। इसी दिशा में केंद्र और राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही हैं। प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने को उन्होंने सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित रखने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर के विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश की धार्मिक पहचान और मजबूत होगी।

इसके साथ ही, दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज’ की स्थापना को भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया। उन्होंने कहा कि इस तरह के संस्थान आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करेंगे।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह सद्भावना सम्मेलन समाज में एकता, सद्भाव और सेवा की भावना को और अधिक मजबूत करेगा। उन्होंने आयोजन की सफलता के लिए “मानव सेवा एवं उत्थान समिति” और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं।
