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उत्तराखंड में कुदरत का डबल अटैक:कही पकी फसल पर ओलो का प्रहार तो कहीं बद्री–केदार में भारी बर्फबारी


देहरादून।देवभूमि उत्तराखंड में एक बार फिर कुदरत के मिजाज तल्ख नजर आ रहे हैं। अप्रैल के महीने में जहाँ सूरज की तपिश महसूस होनी चाहिए थी, वहीं पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से समूचे राज्य में बेमौसम बारिश और ठंड का दौर लौट आया है। मौसम विभाग ने राज्य के विभिन्न हिस्सों के लिए ऑरेंज अलर्ट (Orange Alert) जारी करते हुए नागरिकों और पर्यटकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

आसमान से बरसेगी ‘सफेद आफत’

​मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले 24 घंटों में देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, चंपावत, हरिद्वार और उत्तरकाशी जिलों में मौसम का सबसे रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ भीषण ओलावृष्टि (Hailstorm) और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज झक्कड़ हवाओं का पूर्वानुमान है। प्रशासन ने इस ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।

पहाड़ों में चांदी, मैदानों में ठिठुरन

​उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कुदरत का करिश्मा और कहर दोनों एक साथ देखने को मिल रहे हैं। बद्रीनाथ, केदारनाथ, हेमकुंड साहिब, औली और चोपता जैसे 3300 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में निरंतर बर्फबारी (Snowfall) का सिलसिला जारी है। इस हिमपात ने जहाँ चारधाम यात्रा की तैयारियों में बाधा उत्पन्न की है, वहीं मैदानी क्षेत्रों में चलने वाली बर्फीली हवाओं ने तापमान के ग्राफ को तेजी से नीचे गिरा दिया है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में 5°C से 6°C तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को अलमारी से दोबारा गर्म कपड़े निकालने पर मजबूर होना पड़ा है।

अन्नदाता पर संकट के बादल

​इस बेमौसम बदलाव ने सबसे ज्यादा चिंता प्रदेश के किसानों की बढ़ा दी है। वर्तमान में मैदानों में गेहूं की फसल पककर तैयार है और कटाई का समय है। ऐसे में तेज हवाओं के साथ होने वाली ओलावृष्टि पकी हुई गेहूं की फसल और बागवानी (विशेषकर सेब और लीची के बौर) के लिए काल साबित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि यदि संभव हो तो कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखें, क्योंकि यह Weather Update आने वाले कुछ दिनों तक इसी तरह चिंताजनक बनी रह सकती है।

पर्यटकों के लिए चेतावनी

उत्तराखंड मौसम के इस अनिश्चित स्वरूप को देखते हुए बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों को भी सावधानी बरतने को कहा गया है। पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन और ओलावृष्टि के कारण फिसलन बढ़ने की आशंका है। Uttarakhand Weather में आए इस बड़े बदलाव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन और पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को तेजी से प्रभावित कर रहा है।

​अगले कुछ दिनों तक प्रदेशवासियों को इस ‘सफेद आफत’ और ठंडी हवाओं के बीच जीवनयापन करना होगा। प्रशासन ने आपदा प्रबंधन टीमों को हाई अलर्ट पर रखा है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके।

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