देहरादून।उत्तराखंड की राजनीति में इस समय सबसे बड़ी चर्चा कांग्रेस के भीतर जारी अंतर्कलह (Internal Strife) और गुटबाजी (Factionalism) की है। राज्य में पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और नेताओं की आपसी खींचतान को थामने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा (Kumari Selja) 8 अप्रैल से उत्तराखंड के पांच दिवसीय महत्वपूर्ण दौरे पर आ रही हैं। राजनीतिक गलियारों में इस दौरे को कांग्रेस के लिए ‘डैमेज कंट्रोल’ के रूप में देखा जा रहा है।
कुमाऊं से गढ़वाल तक मंथन का दौर
कुमारी शैलजा का यह दौरा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। वह रुद्रपुर, हल्द्वानी, कोटद्वार, हरिद्वार, मसूरी और देहरादून जैसे प्रमुख केंद्रों पर कार्यकर्ताओं और नेताओं की नब्ज टटोलेंगी। इस पांच दिवसीय दौरे (5-Day Tour) का मुख्य उद्देश्य बिखरी हुई कांग्रेस को एक मंच पर लाना और कार्यकर्ताओं में नए जोश का संचार करना है।
8 अप्रैल: रुद्रपुर से शुरुआत
कुमारी शैलजा अपने दौरे का आगाज़ 8 अप्रैल को रुद्रपुर से करेंगी। यहाँ वह जनपद के वरिष्ट नेताओं (Senior Leaders) और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद करेंगी। पार्टी के भीतर की आपसी खींचतान (Mutual Tussle) को कम करने के लिए यह पहली बड़ी बैठक होगी।
9 अप्रैल: हल्द्वानी और कोटद्वार में शक्ति प्रदर्शन
9 अप्रैल का दिन काफी व्यस्त रहने वाला है। सुबह 10 बजे हल्द्वानी के ऐतिहासिक स्वराज आश्रम में नैनीताल जनपद की महत्वपूर्ण बैठक होगी। नैनीताल कांग्रेस जिलाध्यक्ष (Nainital District President) राहुल छिमवाल के अनुसार, इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल (Ganesh Godiyal) और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य (Yashpal Arya) समेत दिग्गज नेता मौजूद रहेंगे। इसके पश्चात शैलजा कोटद्वार के लिए रवाना होंगी, जहाँ वह देर शाम स्थानीय इकाई के साथ बैठक कर संगठन की मजबूती पर चर्चा करेंगी।
हरिद्वार में आस्था और राजनीति का संगम
10 अप्रैल को कुमारी शैलजा कोटद्वार से हरिद्वार पहुँचेंगी। यहाँ वह न केवल हरिद्वार और रुड़की के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगी, बल्कि सायंकालीन गंगा आरती (Ganga Aarti) में भी प्रतिभाग करेंगी। यह कदम कार्यकर्ताओं और जनता के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाने का प्रयास माना जा रहा है।
राजधानी देहरादून में निर्णायक बैठकें
11 और 12 अप्रैल को कुमारी शैलजा मसूरी और देहरादून में मोर्चा संभालेंगी। यहाँ वह महिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस, अल्पसंख्यक विभाग और पूर्व सैनिक विभाग के पदाधिकारियों की क्लास लेंगी। 12 अप्रैल को देहरादून में आयोजित जय भीम जय हिंद (Jai Bhim Jai Hind) कार्यक्रम उनके दौरे का समापन बिंदु होगा, जो पार्टी के अनुसूचित जाति और छात्र संगठन को एकजुट करने का बड़ा संदेश देगा।
क्या थमेगी बयानबाजी की आंच?
कुमारी शैलजा के आगमन से ठीक पहले राज्य कांग्रेस में नेताओं की एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी (Political Statements) ने हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश कांग्रेस ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि सभी वरिष्ठ नेता इन बैठकों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। चर्चा है कि प्रभारी के आने से पार्टी में व्याप्त अंतर्कलह की आंच कुछ हद तक नरम पड़ सकती है। यदि कुमारी शैलजा इन पांच दिनों में गुटों में बंटे नेताओं को एक पटरी पर लाने में सफल रहीं, तो आगामी चुनावों में कांग्रेस एक सशक्त विपक्ष के रूप में खुद को स्थापित कर पाएगी।
