रिश्तों का खून: जब रक्षक ही बन गए भक्षक
उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पारिवारिक रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह सनसनीखेज पिथौरागढ़ मर्डर मिस्ट्री जौलजीबी क्षेत्र की है, जहां मामूली कहासुनी ने ऐसा खूनी रूप अख्तियार किया कि अपनों ने ही अपने खून का कत्ल कर डाला। खून के रिश्तों की दुहाई देने वाले समाज में एक सगे भाई ने चाची और चचेरे भाइयों के साथ मिलकर भाई की बेरहमी से हत्या कर दी। इस जघन्य अपराध को अंजाम देने के बाद साक्ष्यों को मिटाने के लिए शव को जंगल की गहराइयों में पत्थरों और मिट्टी के नीचे दबा दिया गया। हालांकि, कानून के लंबे हाथों से वे बच नहीं सके और त्वरित कार्रवाई करते हुए उत्तराखंड पुलिस ने मुख्य आरोपी सगा भाई गिरफ्तार कर लिया है, साथ ही सह-आरोपियों को भी सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।
विवाद की चिंगारी और खूनी खेल
यह दर्दनाक घटना धारचूला विकासखंड के किमखोला स्थित भगतिरुवा तोक की है। पुलिस के अनुसार, मृतक की शिनाख्त वनराजी जनजाति समुदाय के कुंदन सिंह रजवार के रूप में हुई है। घटना की शुरुआत 22 मार्च 2026 की शाम को हुई, जब कुंदन सिंह का अपनी चाची बसंती देवी के साथ किसी बात को लेकर मामूली विवाद हो गया। विवाद की यह छोटी सी चिंगारी देखते ही देखते विकराल आग में बदल गई।
जैसे ही बहस बढ़ी, चाची बसंती देवी के दो बेटे—रमेश सिंह और जनक सिंह—भी इस झगड़े में कूद पड़े। हद तो तब हो गई जब कुंदन का अपना सगा भाई, प्रदीप सिंह भी समझौते की कोशिश करने के बजाय हिंसक भीड़ का हिस्सा बन गया। गुस्से के आवेश में चारों आरोपियों के सिर पर खून सवार हो गया। उन्होंने कुंदन सिंह को घेर लिया और लोहे के पाइप तथा लकड़ी के भारी डंडों से उस पर अंधाधुंध वार करने लगे। प्रहार इतने घातक और बर्बर थे कि कुंदन संभल भी नहीं पाया और उसने मौके पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
गुनाह छिपाने की साजिश: जंगल में दफन किया शव
कुंदन की मौत के बाद आरोपियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। अपने इस घिनौने कृत्य को कानून की नजरों से छिपाने के लिए उन्होंने एक सोची-समझी साजिश रची। अगले दिन यानी 23 मार्च की सुबह, तड़के ही चारों आरोपियों ने कुंदन के शव को घर से उठाया और झिपुखोला गदेरे के पास स्थित घने जंगल में ले गए। वहां उन्होंने शव को पत्थरों और मिट्टी से ढक दिया, ताकि किसी को कानो-कान खबर न हो और यह जौलजीबी हत्याकांड हमेशा के लिए एक अनसुलझा राज बनकर रह जाए। वे मान बैठे थे कि जंगल का सन्नाटा उनके इस काले कारनामे को खुद में दफन कर लेगा।
उत्तराखंड पुलिस की मुस्तैदी और पर्दाफाश
अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, वह कोई न कोई सुराग जरूर छोड़ जाता है। इस मामले में भी यही हुआ। कुंदन के लापता होने पर उसकी पत्नी रेखा देवी को अनहोनी की आशंका हुई। बिना समय गंवाए उन्होंने जौलजीबी थाने में तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई। तहरीर मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया।
जौलजीबी थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार के कुशल नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और स्थानीय मुखबिरों के जाल की मदद से त्वरित दबिश दी। कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपियों के चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगीं और उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपियों की ही निशानदेही पर पुलिस ने जंगल के पत्थरों के नीचे से कुंदन का क्षत-विक्षत शव बरामद किया। इसके साथ ही वारदात में इस्तेमाल किए गए लोहे के पाइप और डंडे भी बरामद कर लिए गए हैं।
इस पूरी Pithoragarh Murder Mystery का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने मुख्य रूप से मृतक का Real Brother Arrested (प्रदीप सिंह) करने के साथ ही चाची बसंती देवी और चचेरे भाइयों (रमेश और जनक) को दबोच लिया। यह त्वरित सफलता दिखाती है कि Uttarakhand Police अपराधियों के खिलाफ कितनी मुस्तैद है।
न्याय की ओर बढ़ते कदम
पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर सक्षम न्यायालय में पेश किया जा रहा है, जहां से उन्हें सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी है। इस खौफनाक Jauljibi Homicide ने न सिर्फ सीमांत क्षेत्र के लोगों को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि यह सवाल भी छोड़ दिया है कि आखिर मामूली गुस्से में आकर इंसान अपने ही भाई का हत्यारा कैसे बन सकता है? पुलिस अब मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है ताकि अपराधियों को उनके किए की सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।
