शिक्षा की आड़ में आर्थिक शोषण, रामनगर टैक्स बार ने खोली निजी स्कूलों की पोल
रामनगर (उत्तराखंड)।शिक्षा के पावन मंदिर अब व्यापारिक प्रतिष्ठानों में तब्दील होते जा रहे हैं। रामनगर क्षेत्र के निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों के किए जा रहे आर्थिक शोषण (Economic Exploitation) को लेकर रामनगर टैक्स बार (Ramnagar Tax Bar) ने अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। अधिवक्ताओं और कर विशेषज्ञों के इस प्रतिष्ठित संगठन ने स्कूलों की तानाशाही पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह मामला सीधे शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री के दरबार तक जाएगा।
वार्षिक शुल्क के नाम पर ‘अवैध वसूली’ का खेल
संगठन की एक महत्वपूर्ण बैठक में रामनगर टैक्स बार (Ramnagar Tax Bar) के अध्यक्ष पूरन पांडे ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी (Private School Arbitrariness) अपनी चरम सीमा पार कर चुकी है। उन्होंने उजागर किया कि क्षेत्र के कई नामी स्कूल पुराने छात्रों से, जो पहले से ही वहां अध्ययनरत हैं, दोबारा वार्षिक शुल्क (Annual Charges) वसूल रहे हैं। यह न केवल अनैतिक है, बल्कि शिक्षा के अधिकार की मूल भावना के भी विपरीत है। पूरन पांडे के अनुसार, “शिक्षा के नाम पर अभिभावकों की जेबों पर डकैती डालना न्यायोचित नहीं है।”
किताबों और कॉपियों के सिंडिकेट का पर्दाफाश
टैक्स बार के उपसचिव मनु अग्रवाल ने स्कूलों के भीतर चल रहे ‘अघोषित सिंडिकेट’ पर प्रहार किया। उन्होंने बताया कि विद्यालय प्रबंधन अभिभावकों को मजबूर कर रहे हैं कि वे कॉपी, किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्री केवल विद्यालय के अंदर स्थित काउंटरों या उनके द्वारा निर्धारित दुकानों से ही खरीदें। अभिभावक अधिकार (Parental Rights) का हनन करते हुए ये स्कूल बाजार भाव से कहीं अधिक दरों पर सामग्री बेच रहे हैं।
चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि कई मामलों में इन सामग्रियों की खरीद पर कोई वैध बिल या रसीद नहीं दी जा रही है। यह सीधे तौर पर टैक्स चोरी और उपभोक्ता अधिकारों (Consumer Rights) का उल्लंघन है। बाजार में वही सामग्री कम दाम पर उपलब्ध होने के बावजूद अभिभावकों को विवश करना शिक्षा का व्यापारीकरण (Commercialization of Education) ही है।
अधिवक्ताओं ने एक सुर में भरी हुंकार
इस गंभीर मुद्दे पर आयोजित बैठक में अधिवक्ता प्रबल बंसल, भूपाल रावत, फिरोज अंसारी, मनोज अग्रवाल, लईक अहमद, नावेद सैफी और गुलरेज़ रज़ा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्कूलों का यह व्यवहार मध्यवर्गीय परिवारों की कमर तोड़ रहा है। वक्ताओं ने कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी (Private School Arbitrariness) के कारण अभिभावकों पर जो अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ रहा है, वह अब बर्दाश्त के बाहर है।
प्रशासन को अल्टीमेटम और प्रमुख मांगें
रामनगर टैक्स बार (Ramnagar Tax Bar) ने शासन-प्रशासन से निम्नलिखित मांगों पर तत्काल कार्रवाई की अपील की है:
- दोबारा शुल्क पर रोक: पुराने छात्रों से किसी भी प्रकार का पुन: प्रवेश शुल्क या वार्षिक शुल्क लेने पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए।
- बाजार की स्वतंत्रता: अभिभावकों को शैक्षणिक सामग्री खुले बाजार से खरीदने की पूर्ण स्वतंत्रता हो।
- पारदर्शिता और ऑडिट: स्कूलों द्वारा बेची जा रही सामग्री की बिलिंग प्रक्रिया की जांच हो ताकि कर चोरी रोकी जा सके।
- सख्त कानूनी कार्रवाई: शिक्षा के मानकों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों की मान्यता रद्द करने जैसी कठोर कार्यवाही की जाए।
मुख्यमंत्री तक गूंजेगी आवाज
संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस शिक्षा माफियागिरी (Education Scam) पर लगाम लगाने में विफल रहता है, तो अधिवक्ताओं का एक शिष्टमंडल देहरादून जाकर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मुलाकात करेगा। रामनगर टैक्स बार (Ramnagar Tax Bar) का यह कड़ा रुख क्षेत्र के हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की एक किरण बनकर उभरा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस आर्थिक शोषण (Economic Exploitation) को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।
