
नैनीताल। देवभूमि में चल रहे चर्चित प्रकरण में मुख्य अभियुक्त मदन जोशी को बड़ी राहत देने से अदालत ने साफ़ इनकार कर दिया है। कोर्ट ने उनके कृत्य को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखते हुए कहा कि यह मामला किसी भी प्रकार की ढील या संरक्षण के योग्य नहीं है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस को निर्देश दिए कि वे मामले के कमर्शियल एंगल की गहराई से जांच करें—क्या यह हिंसा किसी प्रतिस्पर्धी सप्लायर के इशारे पर भड़काई गई थी? अदालत ने स्पष्ट किया कि कारोबारी प्रतिद्वंद्विता से उपजी अशांति की भी जांच आवश्यक है।
‘क्रांति’ संबंधी टिप्पणियों पर कड़ी टिप्पणी
मदन जोशी द्वारा सोशल मीडिया पर की गई ‘क्रांति’ विषयक पोस्ट पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा—
“यह देवभूमि है, क्रांति भूमि नहीं… यहां क्रांति नहीं, शांति की आवश्यकता है।”
कोर्ट ने कहा कि ऐसे बयान सामाजिक शांति भंग करने वाले और गैर-ज़िम्मेदाराना हैं।
गिरफ्तारी पर रोक से इनकार करते हुए अदालत ने पुलिस को कुर्की की कार्यवाही में तेजी लाने का आदेश दिया है।
शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा प्रस्तुत न्यायिक नज़ीरों का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने माना कि मुख्य अभियुक्त का कृत्य किसी भी प्रकार की राहत योग्य नहीं है।
अंततः, अदालत ने मदन जोशी की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी तथा उनकी ओर से दायर एफआईआर निरस्तीकरण याचिका भी पूरी तरह से खारिज कर दी।
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