मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के गलियारों में सोमवार का सूरज नई उम्मीदें लेकर आया। पिछले तीन कारोबारी सत्रों से मचे हाहाकार और निवेशकों के करोड़ों रुपये स्वाहा होने के बाद, हफ्ते के पहले दिन बाजार ने एक मजबूत वापसी (Recovery) का संकेत दिया है। शुरुआती सत्र में आए भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद, शेयर बाजार (Stock Market) के दोनों प्रमुख सूचकांक, बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी, हरे निशान में लौटने में कामयाब रहे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिकवरी मुख्य रूप से दिग्गज शेयरों में हुई ‘वैल्यू बाइंग’ (Value Buying) और ‘घरेलू निवेशकों’ (DIIs) के अडिग भरोसे का परिणाम है।
शुरुआती उतार-चढ़ाव और जोरदार वापसी
सोमवार सुबह जब बाजार खुला, तो निवेशकों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ थीं। वैश्विक संकेतों के दबाव में सेंसेक्स एक समय 179.31 अंक गिरकर 74,384.61 के निचले स्तर पर चला गया था, जबकि निफ्टी भी 23,098 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक फिसल गया था। ऐसा लग रहा था कि पिछले शुक्रवार की 1,470 अंकों की ऐतिहासिक गिरावट का सिलसिला जारी रहेगा।
हालांकि, जैसे ही बाजार निचले स्तरों पर पहुँचा, दिग्गज बैंकों और ब्लू-चिप कंपनियों के शेयरों में खरीदारी की होड़ मच गई। देखते ही देखते सेंसेक्स (Sensex) 342.02 अंक उछलकर 74,899.76 पर और निफ्टी (Nifty) 88.55 अंक की बढ़त के साथ 23,240.95 के स्तर पर जा पहुँचा। बाजार की इस ‘रिकवरी’ (Recovery) ने निवेशकों को बड़ी राहत दी है।
दिग्गज शेयरों का प्रदर्शन: किसने बढ़ाया दम?
आज के कारोबार में बैंकिंग और हेवीवेट शेयरों ने बाजार की नैय्या को पार लगाया। सेंसेक्स की शीर्ष 30 कंपनियों में एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और एसबीआई (SBI) जैसे दिग्गजों ने ‘वैल्यू बाइंग’ के जरिए बाजार को स्थिरता प्रदान की। इसके अलावा अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील, इंडिगो (इंटरग्लोब एविएशन) और आईटीसी (ITC) के शेयरों में भी तगड़ी खरीदारी देखी गई।
दूसरी ओर, बाजार की इस बढ़त को सीमित करने का काम आईटी और ऑटो सेक्टर के कुछ शेयरों ने किया। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंफोसिस, ट्रेंट और टीसीएस (TCS) जैसे शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे बाजार की रफ्तार पर कुछ हद तक ब्रेक लगा।
वैश्विक संकेत और कच्चे तेल की चुनौती
भारतीय बाजार की इस बढ़त के बीच वैश्विक परिस्थितियां अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। एशियाई बाजारों में आज मिला-जुला रुख रहा; जहाँ जापान का निक्केई और चीन का शंघाई कंपोजिट गिरावट के साथ बंद हुए, वहीं हांगकांग के हैंग सेंग ने कुछ मजबूती दिखाई। अमेरिकी बाजारों की पिछले सत्र की कमजोरी ने भी सुबह के वक्त भारतीय निवेशकों को सतर्क रखा।
सबसे बड़ी चिंता का विषय अंतरराष्ट्रीय बाजार में ‘कच्चा तेल’ (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड 1 प्रतिशत की तेजी के साथ 104.2 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया है। पश्चिम एशिया (ईरान, इजरायल और अमेरिका) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में शिपिंग बाधाओं की आशंका ने तेल की कीमतों को हवा दी है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम है।
विदेशी बनाम घरेलू निवेशक (FII vs DII)
बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से बिकवाली का सिलसिला अभी थमा नहीं है। पिछले शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने 10,716.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जो हाल के समय की सबसे बड़ी निकासी है। लेकिन, भारतीय बाजार की असली ताकत ‘घरेलू निवेशकों’ (DIIs) बनकर उभरे हैं, जिन्होंने उसी दिन 9,977.42 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को पूर्ण पतन से बचा लिया।
पिछले शुक्रवार को सेंसेक्स में आई 1,470.50 अंकों की गिरावट के बाद आज की रिकवरी मरहम का काम कर रही है। हालांकि, निवेशकों को अभी भी ‘सावधानी हटी दुर्घटना घटी’ वाली नीति अपनानी होगी। कच्चे तेल की चाल और मध्य-पूर्व का युद्ध तनाव इस पूरे हफ्ते बाजार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल, एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और एसबीआई (SBI) की मजबूती ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय बाजार में अभी भी ‘वैल्यू’ बची हुई है।
