उत्तरकाशी।कहावत है कि “हौसलों के आगे पहाड़ भी झुक जाते हैं”, लेकिन उत्तरकाशी के कपूर मोहल्ला के बच्चों ने इसे सच कर दिखाया। जब खेलने की आजादी पर पहरा लगा, तो इन नन्हे जांबाजों ने न किसी बड़े का सहारा लिया और न ही शोर मचाया। वे सीधे जिले के मुखिया, जिलाधिकारी (DM) प्रशांत आर्य की चौखट पर पहुंच गए। उनकी मासूमियत और निडरता के आगे प्रशासन ने न केवल उनकी बात सुनी, बल्कि तुरंत समाधान भी किया।
मामला क्या था?
हाल ही में वार्षिक परीक्षाएं समाप्त होने के बाद कपूर मोहल्ला के बच्चे उत्साह के साथ पुरीखेत मैदान में खेलने गए थे। लेकिन वहां तैनात वॉचमैन उनके लिए रुकावट बन गया। बच्चों का आरोप है कि उन्हें गेट से ही डांटकर भगा दिया जाता था। कई दिनों तक जब यह सिलसिला नहीं रुका, तो बच्चों ने तय किया कि वे अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे।
DM ऑफिस में मची खलबली
जब कलेक्ट्रेट के गेट पर छोटे बच्चों की टोली पहुंची, तो सुरक्षाकर्मी भी हैरान रह गए। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बच्चों को अपने पास बुलाया और उनसे बात की। बच्चों ने बिना किसी झिझक के अपनी आपबीती सुनाई: “साहब, हमें खेलना है, लेकिन वॉचमैन डराकर भगा देता है।”
डीएम का ‘क्विक एक्शन’
बच्चों के आत्मविश्वास से प्रभावित होकर जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य को फोन लगाया। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि बच्चों को खेल के मैदान में जाने से न रोका जाए। डीएम ने बच्चों को दुलारते हुए कहा— “अब कोई नहीं रोकेगा, तुम सब मस्त होकर खेलो!”
“इन बच्चों का आत्मविश्वास काबिले तारीफ है। लोकतंत्र में अपनी आवाज उठाना सबका हक है, चाहे वो बच्चे ही क्यों न हों। उनकी समस्या का समाधान कर खुशी हुई।” — प्रशांत आर्य, जिलाधिकारी, उत्तरकाशी
रिपोर्ट: कीर्ति निधि सजवान, उत्तरकाशी।
