मुंबई।पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के बारूदी ढेरों से उठी चिंगारी ने भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी है। युद्ध की बढ़ती आशंका और वैश्विक अनिश्चितता के बीच इस कारोबारी सप्ताह में दलाल स्ट्रीट पर ‘ब्लैक फ्राइडे’ जैसा मंजर देखा गया। सप्ताह के आखिरी सत्र में बिकवाली का ऐसा सैलाब आया कि सेंसेक्स 1,470 अंक फिसलकर 74,563 के स्तर पर जा गिरा, जबकि निफ्टी 5.31% की भारी साप्ताहिक गिरावट के साथ 23,151 पर बंद हुआ।
बाजार के धराशायी होने के 3 बड़े कारण:
- क्रूड ऑयल का उबाल: युद्ध की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। तेल महंगा होने से महंगाई और राजकोषीय घाटे का डर गहरा गया है।
- FIIs की आक्रामक निकासी: विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख किया है।
- डॉलर का दबाव: रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर 92.45 पर पहुंच गया है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दोहरी मार पड़ी है।
सेक्टोरल शॉक: ऑटो सेक्टर में 4 साल की सबसे बड़ी गिरावट
बाजार की इस गिरावट में सबसे ज्यादा गाज ऑटो सेक्टर पर गिरी है। निफ्टी ऑटो इंडेक्स इस हफ्ते 10-11% तक टूट गया, जो साल 2020 के कोरोना संकट के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। इसके साथ ही बैंकिंग और मेटल शेयरों में भी निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की। जानकारों का मानना है कि सीएनजी और एलएनजी की संभावित कमी ने विनिर्माण क्षेत्र की नींद उड़ा दी है।
निवेशकों की डूबी संपत्ति, बढ़ा ‘खौफ’ का इंडेक्स
बाजार में मची इस खलबली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल शुक्रवार के एक ही सत्र में निवेशकों की करीब 9.5 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति खाक हो गई। बाजार में डर को मापने वाला इंडेक्स ‘इंडिया विक्स’ (India VIX) 22 के पार निकल गया है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आने वाले दिनों में बाजार में और भी भीषण उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय: अब क्या होगा?
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए अब 23,000 का स्तर ‘करो या मरो’ की स्थिति वाला सपोर्ट है।
- सपोर्ट लेवल: यदि निफ्टी 23,000 के स्तर को तोड़ता है, तो गिरावट और गहरी हो सकती है।
- रेजिस्टेंस: रिकवरी की स्थिति में ऊपर की ओर 23,300 और 23,500 पर कड़ा प्रतिरोध (Resistance) खड़ा है।
- बैंक निफ्टी: बैंकिंग सेक्टर के लिए 53,000 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण बना हुआ है।
फिलहाल बाजार पूरी तरह से ग्लोबल संकेतों और युद्ध की खबरों पर टिका है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में कोई बड़ा दांव न लगाएं और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करें।
