
रामनगर।कानिया दूध डेयरी, रामनगर में आयोजित संगोष्ठी में किसान संघर्ष समिति ने अमेरिका और अन्य साम्राज्यवादी देशों के साथ हो रहे गैरबराबरीपूर्ण कृषि समझौतों को लेकर कड़ा विरोध जताया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजवादी लोक मंच के संयोजक मुनीष कुमार ने कहा कि अमेरिका भारत पर लगातार दबाव बना रहा है कि भारतीय बाजार उसके डेयरी, मक्का, सोयाबीन और चावल जैसे उत्पादों के लिए खोले जाएं। इसके लिए हाल ही में नीति आयोग ने एक वर्किंग पेपर जारी किया था, जिसमें मंडी कानूनों में बदलाव, किसानों से सीधी खरीद और जेनिटिकली मॉडिफाइड बीजों के आयात की सिफारिश की गई थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अमेरिका की शर्तों पर झुकने को तैयार दिख रही है। हाल ही में सरकार ने अमेरिका से आने वाली कपास पर आयात शुल्क 11% से घटाकर शून्य कर दिया है, जिससे स्पष्ट है कि आने वाले समय में कृषि व डेयरी सेक्टर भी विदेशी कंपनियों के लिए खोला जा सकता है।

मुनीष कुमार ने कहा,
“भारत में 140 करोड़ जनता की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। 85 करोड़ लोग 5 किलो राशन पर गुजारा कर रहे हैं, जबकि कॉरपोरेट घराने रोजाना हजारों करोड़ कमा रहे हैं। सरकार देश की संपत्ति जनता की बजाय विदेशी बाजारों और कॉरपोरेट को सौंप रही है।”
ललित उप्रेती ने कहा कि देश के किसान किसी भी कीमत पर अमेरिकी कृषि समझौते को स्वीकार नहीं करेंगे। अगर सरकार ने जबरन विदेशी डेयरी और कृषि उत्पाद भारत में आने दिए तो किसान आंदोलन के लिए तैयार हैं।

महिला एकता मंच की ललिता रावत ने कहा कि उत्पादन का उद्देश्य जनता की जरूरतें पूरी करना होना चाहिए, लेकिन मौजूदा नीतियों से देश को बर्बादी की ओर धकेला जा रहा है।
संगोष्ठी में रमेश जोशी, आसिफ अली, गिरीश चंद्र सहित कई वक्ताओं ने विचार रखे।
कार्यक्रम में आनंद नेगी, ललित मोहन पांडे, प्रेम आर्य, किशन शर्मा, नन्द किशोर, उमाकांत ध्यानी, महेश जोशी, माया नेगी, रेखा जोशी, किरन आर्य, भगवती आर्य, देवी आर्य, रजनी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
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