ऐतिहासिक फैसला: अब ततैया और मधुमक्खी का हमला भी ‘मुआवजे’ के दायरे में, धामी सरकार ने दी बड़ी राहत

वन्य जीवों से नुकसान पर मुआवजे का दायरा बढ़ा

भालुओं से फसल चौपट होने के मामलों में भी मुआवजे पर सरकार गंभीर

मकान को क्षति पहुंचने पर मुआवजे का पहले ही हो चुका है निर्णय

ततैंया औैर मधुमक्खी के काटने पर भी अब मिल रहा है मुआवजा

गैरसैंण: उत्तराखंड की धामी सरकार ने मानव-वन्य जीव संघर्ष से प्रभावित लोगों के लिए राहत का दायरा बढ़ाकर एक मिसाल पेश की है। सरकार ने न केवल मुआवजे की राशि में भारी बढ़ोतरी की है, बल्कि कई ऐसे नुकसानों को भी इसमें शामिल किया है जो अब तक सरकारी फाइलों से बाहर थे।

प्रमुख बदलाव: एक नजर में

  • मृत्यु पर अब ₹6 लाख की सहायता: वन्य जीव हमले में जान गंवाने वाले परिजनों को मिलने वाली आर्थिक मदद को 4 लाख से बढ़ाकर 6 लाख रुपये कर दिया गया है।
  • भालुओं के आतंक पर सरकार सख्त: भालुओं द्वारा मकानों और भवनों को पहुंचाई जाने वाली क्षति पर मुआवजे की व्यवस्था पहले ही लागू की जा चुकी है। अब सरकार फसलों के नुकसान को भी इस दायरे में लाने के लिए गंभीर है।
  • ततैंया और मधुमक्खी भी शामिल: यह पहली बार है जब छोटे जीवों जैसे ततैंया या मधुमक्खी के काटने पर भी सरकार ने मुआवजे का प्रावधान किया है।

वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर होगा फैसला

​बजट सत्र के दौरान वन मंत्री सुबोध उनियाल ने स्पष्ट किया कि भालुओं के बदलते व्यवहार और उनसे होने वाले नुकसान पर सरकार की पैनी नजर है। भारतीय वन्य जीव संस्थान (WII) को इस पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है। इस रिपोर्ट के प्राप्त होते ही भालुओं से फसल चौपट होने पर भी मुआवजा मिलना शुरू हो जाएगा।

“धामी सरकार का संकल्प: वन्य जीवों का संरक्षण भी और प्रभावित नागरिकों का पूर्ण आर्थिक हित भी।”

क्यों खास है यह निर्णय?

​अक्सर पहाड़ी क्षेत्रों में वन्य जीवों द्वारा फसलों और घरों को भारी नुकसान पहुँचाया जाता था, लेकिन ठोस नीति के अभाव में ग्रामीणों को खाली हाथ रहना पड़ता था। सरकार के इस कदम से सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वन्य जीव संघर्ष की स्थिति में उन्हें तत्काल आर्थिक संबल मिल सकेगा।

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