साहित्यिक साधना का सम्मान: जगदीश पंत कुमुद राज्यपाल द्वारा ‘एक पहाड़ी ऐसा भी’ मंच पर सम्मानित

देहरादून/खटीमा (उत्तराखंड): उत्तराखंड की पावन धरा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक साधना के लिए सदैव विख्यात रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष और क्षेत्र के लब्धप्रतिष्ठित साहित्यकार जगदीश पंत कुमुद ने एक नई उपलब्धि अपने नाम की है। शनिवार को राजधानी देहरादून में आयोजित एक भव्य गरिमामयी समारोह ‘एक पहाड़ी ऐसा भी’ में राज्य के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने जगदीश पंत कुमुद को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक अवदान के लिए सम्मानित किया। यह क्षण न केवल कुमुद के लिए, बल्कि समूचे उत्तराखंड के बौद्धिक जगत के लिए गौरव का विषय बन गया है।

साहित्यिक सृजन और कर्मठता का संगम

जगदीश पंत कुमुद का व्यक्तित्व बहुआयामी है। वे वर्तमान में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चकरपुर, खटीमा में फार्मेसी अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। चिकित्सा जैसे संवेदनशील पेशे में होने के बावजूद, उन्होंने अपनी लेखनी और साहित्यिक साधना को कभी विराम नहीं दिया। साहित्य की विविध विधाओं में निरंतर सृजनरत रहकर उन्होंने समाज को दिशा देने का कार्य किया है। रेड एफएम द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम ‘एक पहाड़ी ऐसा भी’ का मूल उद्देश्य ही राज्य की ऐसी विभूतियों को सामने लाना है, जो अपने कार्यक्षेत्र के साथ-साथ अपनी जड़ों और संस्कृति के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे हैं।

राज्यपाल द्वारा सराहना और सम्मान

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल सम्मान प्रदान करते हुए राज्यपाल ने कुमुद के दीर्घकालीन साहित्यिक सेवा कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि साहित्य ही समाज का दर्पण होता है और जगदीश पंत कुमुद जैसे रचनाकार अपनी वैचारिक शक्ति से समाज को नई चेतना प्रदान कर रहे हैं। साहित्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनकी सक्रियता ने राज्य के नवोदित लेखकों को एक सशक्त मंच प्रदान किया है। कुमुद द्वारा रचित साहित्य न केवल वर्तमान पीढ़ी को प्रेरित करता है, बल्कि यह भविष्य के लिए भी एक अमूल्य धरोहर है।

खटीमा में हर्ष का वातावरण और बधाइयों का तांता

जैसे ही जगदीश पंत कुमुद को सम्मानित किए जाने की सूचना उनके गृह क्षेत्र खटीमा और चकरपुर पहुँची, वहाँ खुशी की लहर दौड़ गई। क्षेत्र के बुद्धिजीवियों, चिकित्सकों और राजनेताओं ने इसे खटीमा गौरव का प्रतीक बताया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर चिकित्सा जगत और साहित्य जगत के दिग्गजों ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की है। बधाई देने वालों में चिकित्सा अधीक्षक के सी पंत, वी पी सिंह, सिद्धेश्वर सिंह, वरुण अग्रवाल और महेंद्र प्रताप पांडे ‘नंद’ जैसे नाम प्रमुख हैं। इन सभी का मानना है कि कुमुद का लेखन समाज की कुरीतियों पर प्रहार करने के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को सहेजने का कार्य करता है।

​इसके अतिरिक्त, रूप चंद्र शास्त्री, रामरतन यादव, दीपक फुलेरा, हिमांशु बिष्ट, हेमा परिहार, हरीश शर्मा, सौरभ पाण्डे और पूर्व विधायक प्रेम सिंह राणा ने भी इस सम्मान को प्रदेश के हिंदी साहित्य की जीत बताया। वक्ताओं ने कहा कि एक सरकारी सेवा में रहते हुए जिस तन्मयता के साथ कुमुद ने अखिल भारतीय साहित्य परिषद की जिम्मेदारी संभाली है, वह अनुकरणीय है।

जगदीश पंत कुमुद को मिला यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं है, बल्कि यह उस अटूट साधना का प्रतिफल है जो उन्होंने शब्दों और संवेदनाओं के माध्यम से वर्षों तक की है। उत्तराखंड समाचार के गलियारों में आज यह चर्चा का विषय है कि कैसे एक कर्मयोगी अपने पेशे और शौक के बीच संतुलन बनाकर समाज में एक विशिष्ट स्थान प्राप्त कर सकता है। कुमुद की यह यात्रा आने वाले समय में प्रदेश के अन्य साहित्यकारों के लिए प्रेरणा पुंज का कार्य करेगी।

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