सिक्किम में हिमस्खलन के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए पिथौरागढ़ के लाल विकास कुमार, सैन्य सम्मान के साथ ‘अंतिम विदाई’

पिथौरागढ़: शौर्य और संवेदना की पराकाष्ठा

पिथौरागढ़।उत्तराखंड की देवभूमि एक बार फिर अपने एक वीर सपूत के सर्वोच्च बलिदान से गौरवान्वित और मर्माहत है। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के सुकोली निवासी, 19 कुमाऊं रेजिमेंट में तैनात लांस नायक विकास कुमार (LNVikasKumar) का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुँचा, समूचा क्षेत्र ‘विकास अमर रहे’ के जयकारों से गूंज उठा। सिक्किम हिमस्खलन (#SikkimAvalanche) की चपेट में आने से 31 मार्च को देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए विकास कुमार वीरगति को प्राप्त हुए थे। शुक्रवार को जब तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा, तो वहां उपस्थित हर आंख नम हो गई।

विदारक दृश्य: पत्नी की करुण पुकार और आठ माह का मासूम

शहादत की खबर से सुकोली गांव में मातम पसरा हुआ है। सबसे हृदयविदारक दृश्य तब देखने को मिला जब शहीद की 21 वर्षीय पत्नी प्रीति को उनके पार्थिव शरीर के समीप लाया गया। अपनी सुध-बुध खो चुकीं प्रीति को यह विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनके पति अब इस दुनिया में नहीं हैं। वे बार-बार सिसकते हुए बस यही कह रही थीं, “इन्हें अस्पताल ले चलो, ये ठीक हो जाएंगे।” उनकी इस करुण पुकार ने वहां मौजूद सैन्य अधिकारियों और ग्रामीणों के कलेजे को छलनी कर दिया। शहीद के आठ महीने के मासूम बेटे को जब पिता के अंतिम दर्शन कराए गए, तो उस अबोध बालक की चुप्पी ने पूरे माहौल को और अधिक गमगीन कर दिया।

प्रशासनिक और सैन्य सम्मान के साथ अंत्येष्टि

शहीद लांस नायक विकास कुमार को विदाई देने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई, पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे, मेयर कल्पना देवलाल और जिला सैनिक कल्याण अधिकारी करम चंद सहित कई जनप्रतिनिधियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। रामेश्वर घाट पर भारतीय सेना (#IndianArmy) की कुमाऊं रेजिमेंट के जवानों ने मेजर श्रवण कुमार के नेतृत्व में गार्ड ऑफ ऑनर दिया और हवा में गोलियां दागकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। ताऊ के पुत्र बसंत प्रसाद ने मुखाग्नि देकर उनकी अंतिम क्रियाएं संपन्न कीं।

विकास कुमार, फ़ाइल फोटो

भाई का गर्व और सड़क के नामकरण की मांग

शहीद के बड़े भाई नीरज कुमार ने भरे मन से कहा कि उनका भाई देश के लिए जिया और देश के लिए ही उसने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि माँ भारती की रक्षा में दिया गया यह सर्वोच्च बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। नीरज ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि सुकौली-गणकोट सड़क का सुधारीकरण किया जाए और इस मार्ग का नामकरण शहीद विकास कुमार के नाम पर किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके साहस से प्रेरणा ले सकें।

उपसंहार

पिथौरागढ़ का यह लाल हिमालय की बर्फ में भले ही शांत हो गया हो, लेकिन उसकी बहादुरी की गाथाएं उत्तराखंड की पहाड़ियों में सदैव गूंजती रहेंगी। शहीद विकास कुमार की यह अंतिम विदाई केवल एक सैनिक का जाना नहीं है, बल्कि राष्ट्र के प्रति अडिग कर्तव्यनिष्ठा की एक मिसाल है। पूरा देश आज इस वीर के परिवार के साथ खड़ा है।

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