देहरादून/हरिद्वार: उत्तराखंड के हरिद्वार वन प्रभाग के अंतर्गत श्यामपुर रेंज में दो बाघों (टाइगर) के शिकार का मामला अब बेहद गंभीर रूप लेता जा रहा है। इस सनसनीखेज घटना के बाद उत्तराखंड वन विभाग से लेकर राजधानी देहरादून और दिल्ली तक हड़कंप मचा हुआ है। वन्यजीव प्रेमियों की नाराजगी और मामले की गंभीरता को देखते हुए अब केंद्र सरकार भी एक्शन में आ गई है। खबर है कि देशभर में बाघ संरक्षण की निगरानी करने वाली सर्वोच्च संस्था नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) की टीम जल्द ही उत्तराखंड पहुंचेगी। यह टीम घटनास्थल (सजनपुर बीट) का मौका मुआयना करेगी और अब तक वन विभाग द्वारा की गई जांच, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट व गश्त रिकॉर्ड की समीक्षा करेगी।
दो और आरोपी गिरफ्तार, एक अब भी फरार
इस पूरे मामले में वन विभाग को एक बड़ी कामयाबी मिली है। श्यामपुर रेंज में दो बाघों को जहर देकर मारने के मामले में विभाग ने दो और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान आशिक पुत्र गामा और जुप्पी पुत्र अल्लू के नाम से हुई है। इससे पहले वन विभाग आलम उर्फ फ़म्मी नाम के एक आरोपी को पहले ही सलाखों के पीछे भेज चुका है।
हरिद्वार के डीएफओ (DFO) स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि इस मामले में कुल चार आरोपियों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से तीन की गिरफ्तारी हो चुकी है और उन्हें कोर्ट में पेश किया जा रहा है। चौथा आरोपी आमिर हमजा उर्फ मियां अभी भी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए वन विभाग की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और कई ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
भैंस के मांस में जहर मिलाकर किया शिकार, अंग बेचने की थी तैयारी
यह पूरी घटना हरिद्वार वन विभाग की श्यामपुर रेंज के अंतर्गत आने वाली सजनपुर बीट की है। यह क्षेत्र राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज से सटा हुआ है और इसे रिजर्व का बफर जोन माना जाता है, जहां करीब 41 बाघ और सैकड़ों हाथियों की बेखौफ मूवमेंट रहती है।
घटना का खुलासा तब हुआ जब सजनपुर बीट में तैनात वन कर्मियों ने गश्त के दौरान कुछ वन गुज्जरों को संदिग्ध अवस्था में देखा। पूछताछ में उन्होंने अपनी भैंस खोने की बात कही, लेकिन वन कर्मियों को शक हो गया क्योंकि उस संवेदनशील इलाके में चारे वाली घास नहीं थी। इसके बाद जंगल में बड़ा सर्च अभियान चलाया गया। रविवार शाम को एक बाघ और सोमवार दोपहर को कुछ ही दूरी पर एक 2 साल की मादा बाघिन का शव बरामद हुआ।
पकड़े गए आरोपियों ने कुबूल किया है कि बाघिन ने उनकी एक भैंस का शिकार किया था। इसका बदला लेने के लिए उन्होंने भैंस के मांस पर खेतों में डाला जाने वाला जहरीला पदार्थ छिड़क दिया। इस मांस को खाने से दोनों बाघों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने दोनों बाघों के पैर काट दिए और उनकी खाल, पंजे व अन्य अंग अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन वन विभाग की मुस्तैदी से उनका यह प्लान फेल हो गया।
वन मंत्री सख्त: रेंजर को नोटिस, लापरवाही पर सीधे निलंबन की चेतावनी
मामले ने तूल पकड़ा तो उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल खुद बुधवार को हरिद्वार के घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। वन मंत्री इस घटना को लेकर बेहद नाराज दिखे और उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “यह घटना बेहद गंभीर है और सरकार इसे हल्के में नहीं ले रही है। यदि विभागीय स्तर पर किसी भी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सीधे निलंबन (Suspension) की कार्रवाई की जाएगी।”
अधिकारियों की जवाबदेही होगी तय:
वन मंत्री के सख्त रुख के बाद विभाग ने केवल निचले कर्मचारियों पर गाज गिराने की परंपरा को बदलते हुए, संबंधित रेंज के रेंजर को ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। इसके साथ ही रेंजर, फॉरेस्टर और फॉरेस्ट गार्ड से भी जवाब तलब किया गया है।
विभागीय प्रणाली और जांच के स्तर पर उठ रहे सवाल
इस घटना ने उत्तराखंड वन विभाग की कार्यप्रणाली और गश्त व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अति संवेदनशील बफर जोन में इतनी बड़ी वारदात हो जाना और विभाग को भनक तक न लगना सुरक्षा तंत्र की पोल खोलता है।
विभागीय हलकों में इस बात की भी चर्चा है कि जिस रेंजर पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है, वह लंबे समय से हरिद्वार जिले की ही विभिन्न रेंजों (श्यामपुर, रुड़की और खानपुर) में तैनात रहा है। ऐसे में एक ही जिले में इतने लंबे समय तक तैनाती पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इसके अलावा, इतने बड़े और संवेदनशील मामले की जांच फिलहाल एसडीओ (SDO) स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है, जबकि वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े नेटवर्क को खंगालने के लिए जांच प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (PCCF) स्तर के अनुभवी अधिकारी की निगरानी में होनी चाहिए थी। फिलहाल, उत्तराखंड में बढ़ती वन्यजीव तस्करी और हाथियों व बाघों की संदिग्ध मौतों ने राज्य के खुफिया और सुरक्षा नेटवर्क को मजबूत करने की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित कर दिया है। अब देखना यह होगा कि NTCA की जांच में क्या नए खुलासे होते हैं।
