उत्तराखंड: अल्मोड़ा के तड़म गांव में दहशत का पर्याय बना आदमखोर बाघ ट्रेंकुलाइज, कॉर्बेट टीम को मिली बड़ी सफलता


रामनगर/अल्मोड़ा: उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के सल्ट ब्लॉक स्थित तड़म गांव और उसके आसपास के इलाकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले डेढ़ महीने से ग्रामीणों के लिए मौत का काल बने संदिग्ध बाघ को वन विभाग और कॉर्बेट प्रशासन की संयुक्त टीम ने सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर रेस्क्यू कर लिया है। इस बाघ ने क्षेत्र में ऐसी दहशत पैदा कर दी थी कि लोगों का घर से निकलना दुश्वार हो गया था और स्कूलों तक में ताले लटक गए थे।

जंगल के भीतर से किया गया रेस्क्यू

कॉर्बेट पार्क के वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा ने बताया कि वन विभाग की टीम पिछले कई दिनों से इलाके में डेरा डाले हुए थी। सोमवार देर रात टीम को बड़ी सफलता तब मिली, जब तड़म गांव में हुई अंतिम घटना स्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर भीतर जंगल में बाघ की लोकेशन ट्रैक हुई। विशेषज्ञ टीम ने सावधानी बरतते हुए बाघ को ट्रेंकुलाइज किया। प्रारंभिक जांच में यह बाघ ‘नर’ पाया गया है, जिसकी उम्र लगभग 2 से ढाई वर्ष के बीच आंकी गई है।

डेढ़ महीने में दो ग्रामीणों को बनाया शिकार

तड़म गांव में बाघ के आतंक की शुरुआत 31 मार्च 2026 को हुई थी। गांव के 60 वर्षीय खीम सिंह जब जंगल में सूखी लकड़ियां लेने गए थे, तब घात लगाकर बैठे बाघ ने उन पर हमला कर उन्हें मार डाला था। इस घटना के बाद से ही ग्रामीणों में डर बैठ गया था। प्रशासन अभी सचेत हो ही रहा था कि 3 मई को दूसरी हृदयविदारक घटना सामने आई। गांव के ही 55 वर्षीय महिपाल सिंह, जो घास लेकर अपने घर लौट रहे थे, उन पर घर के बेहद करीब ही बाघ ने हमला कर दिया। इस हमले में महिपाल सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।

​लगातार दो मौतों ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया। ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश व्यक्त किया और सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। बढ़ते दबाव और सुरक्षा कारणों को देखते हुए प्रशासन ने ‘मोहान सफारी पर्यटन जोन’ को पर्यटकों के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया था।

DNA जांच से होगी पुष्टि

भले ही बाघ को पकड़ लिया गया है, लेकिन वन विभाग अभी इसे आधिकारिक तौर पर ‘आदमखोर’ घोषित करने से पहले वैज्ञानिक साक्ष्यों का इंतजार कर रहा है। डॉ. दुष्यंत शर्मा ने स्पष्ट किया कि पकड़े गए बाघ के डीएनए (DNA) सैंपल लिए गए हैं, जिन्हें देहरादून स्थित वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) की लैब में भेजा जा रहा है। इन सैंपल्स का मिलान उन ग्रामीणों के घावों और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों से किया जाएगा, जिनकी बाघ के हमले में मौत हुई थी। इसके अतिरिक्त, बाघ के स्वास्थ्य की जांच के लिए उसके ब्लड सैंपल भी लिए गए हैं।

ढेला रेस्क्यू सेंटर में रखा गया है बाघ

रेस्क्यू के बाद बाघ को सुरक्षित तरीके से रामनगर के ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया है। फिलहाल बाघ पूरी तरह स्वस्थ बताया जा रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसकी निगरानी कर रही है। जब तक लैब से रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक बाघ को सेंटर में ही ऑब्जर्वेशन पर रखा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद ही उच्चाधिकारी तय करेंगे कि इस बाघ को वापस जंगल में छोड़ा जाना है या किसी चिड़ियाघर में शिफ्ट किया जाएगा।

खौफ के साये में बीता डेढ़ महीना

इस बाघ के चलते तड़म और आसपास के गांवों में जीवन पूरी तरह थम गया था। लोग शाम होने से पहले ही घरों में कैद हो जाते थे। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूलों को भी बंद करने के निर्देश दिए गए थे। खेतों में काम ठप था और लोग समूहों में लाठी-डंडों के साथ चलने को मजबूर थे। अब बाघ के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, हालांकि वन विभाग ने अभी भी सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

​वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में गश्त अभी भी जारी रहेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इलाके में कोई दूसरा हिंसक जानवर सक्रिय तो नहीं है। कॉर्बेट प्रशासन और अल्मोड़ा वन विभाग की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की जा रही है।

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