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बागेश्वर के सेमधार में गुलदार का आतंक समाप्त: वन विभाग के पिंजरे में कैद हुआ खूंखार तेंदुआ, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस।


बागेश्वर​उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गाथाएं नई नहीं हैं, लेकिन जब कोई हिंसक वन्यजीव बस्तियों के करीब दस्तक देने लगता है, तो जीवन का पहिया सहम सा जाता है। कुछ ऐसा ही मंजर पिछले कई दिनों से बागेश्वर जिले के शीशाखानी ग्राम सभा के अंतर्गत आने वाले सेमधार क्षेत्र में देखने को मिल रहा था। यहाँ गुलदार का आतंक इस कदर व्याप्त था कि सूर्यास्त होते ही लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर थे। लेकिन आज शाम, वन विभाग की मुस्तैदी और ग्रामीणों के धैर्य का सुखद परिणाम सामने आया जब यह खूंखार तेंदुआ विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में कैद हो गया।

दहशत का साया और वन विभाग की रणनीति

पिछले कुछ हफ्तों से सेमधार और आसपास के इलाकों में इस गुलदार की सक्रियता अत्यधिक बढ़ गई थी। पालतू जानवरों पर हमले और इंसानी बस्तियों के पास इसकी दहाड़ ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी थी। स्थानीय निवासियों की निरंतर बढ़ती शिकायतों और सुरक्षा की मांग को देखते हुए, वन क्षेत्राधिकारी केवलानंद पांडे के निर्देशन में वन विभाग ने एक रणनीतिक योजना तैयार की। चार दिन पूर्व, गुलदार की आवाजाही वाले चिन्हित मार्ग पर एक लोहे का मजबूत पिंजरा लगाया गया, जिसमें शिकार का लालच देकर इस वन्यजीव को फंसाने की कोशिश की गई।

सफलता की शाम और ग्रामीणों का उत्साह

आज शाम जैसे ही अंधेरा ढलना शुरू हुआ, भोजन की तलाश में निकला गुलदार वन विभाग के बिछाए जाल में फंस गया। लोहे के दरवाजों के गिरने की धमक के साथ ही पूरे क्षेत्र में खबर फैल गई कि सेमधार का आतंक अब सलाखों के पीछे है। सूचना मिलते ही भारी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए। लोगों के चेहरे पर खौफ की जगह अब संतोष और राहत की सांस देखी जा सकती थी। ग्रामीणों का कहना है कि इस गुलदार की मौजूदगी के कारण बच्चों का स्कूल जाना और महिलाओं का घास-लकड़ी के लिए जंगल जाना दूभर हो गया था।

प्रशासनिक वक्तव्य और आगामी कदम

वन क्षेत्राधिकारी केवलानंद पांडे ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया, “हमें लगातार गुलदार की सक्रियता की इनपुट मिल रही थी। जनसुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए हमने त्वरित कार्रवाई की और आज हमें सफलता मिली।” उन्होंने आगे जानकारी दी कि पकड़े गए गुलदार का रेस्क्यू पूरी तरह से सुरक्षित और मानवीय तरीके से किया गया है। विभाग की टीम अब मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन करते हुए इस तेंदुए का स्वास्थ्य परीक्षण करेगी और उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार इसे आबादी से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया जाएगा

सतर्कता ही सुरक्षा है

भले ही एक गुलदार पकड़ा गया हो, लेकिन वन विभाग ने क्षेत्र में अभी भी पूरी तरह ढिलाई न बरतने की चेतावनी दी है। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे जंगलों के समीपवर्ती क्षेत्रों में अकेले जाने से बचें, विशेषकर सुबह और शाम के धुंधलके में अधिक सावधानी बरतें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में भी किसी वन्यजीव की गतिविधि दिखाई देती है, तो इसकी सूचना तुरंत कंट्रोल रूम को दी जाए ताकि समय रहते किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके। फिलहाल, इस सफलता के बाद सेमधार क्षेत्र में पसरा सन्नाटा अब चहल-पहल में बदल रहा है।

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