
हल्द्वानी। समाज में बढ़ती महिला हिंसा के खिलाफ प्रगतिशील महिला एकता केंद्र ने रविवार को सत्यनारायण मीटिंग हॉल में सेमिनार आयोजित किया। कार्यक्रम की शुरुआत महिला हिंसा में मारी गई महिलाओं को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि देने और ‘करवा चलता रहेगा’ गीत से की गई।

सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि 25 नवंबर को पूरी दुनिया महिला हिंसा उन्मूलन दिवस के रूप में मनाती है, लेकिन इसके बावजूद हर तीसरी महिला किसी न किसी रूप में हिंसा का शिकार हो रही है। महासचिव रजनी जोशी ने कहा कि दावों और संकल्पों के बावजूद समाज में महिलाओं की सुरक्षा लगातार चिंता का विषय बनी हुई है।
वक्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा 25 नवंबर को महिला हिंसा उन्मूलन दिवस घोषित किए जाने के पीछे मिरावल बहनों की हत्या का संदर्भ जोड़ने को भ्रामक बताते हुए कहा कि उनकी हत्या तानाशाह के विरोध के कारण हुई थी, न कि पारिवारिक या सामाजिक महिला हिंसा के कारण।
सेमिनार में कहा गया कि सरकारें हर बड़ी घटना के बाद कानून बनाने की रस्म तो निभाती हैं, लेकिन महिला हिंसा का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2024 रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि दुनिया भर में हर तीन में से एक महिला शारीरिक या यौनिक हिंसा का सामना करती है। पूंजीवादी उपभोक्तावादी संस्कृति और सामाजिक संकट इस हिंसा को और भयावह बना रहे हैं।
वक्ताओं ने उत्तराखंड की 25वीं वर्षगांठ पर भी महिला अपराधों में वृद्धि को गंभीर चिंता बताया। उन्होंने कहा कि ‘देवी’ और ‘शक्ति’ की भूमि कहे जाने वाले राज्य में भी महिलाएं हिंसा और पितृसत्तात्मक मानसिकता का शिकार हैं।

सेमिनार में यह भी कहा गया कि महिलाएं आज भी घर, कार्यस्थल और समाज में दोयम दर्जे की स्थिति में हैं। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान नीतियां महिलाओं को उनके अर्जित अधिकारों से वंचित कर उन्हें फिर से घरेलू दायरे में सीमित करने की कोशिश कर रही हैं।
कार्यक्रम में कहा गया कि महिला शरीर को उपभोग की वस्तु बनाती उपभोक्तावादी संस्कृति और पुरुष प्रधान मानसिकता, दोनों महिलाओं के लिए समान रूप से घातक हैं। वक्ताओं ने जोर दिया कि घरेलू, धार्मिक और पूंजी की तीनहरी गुलामी से मुक्त हुए बिना महिला हिंसा खत्म नहीं हो सकती। इसके लिए महिलाओं के सामूहिक संगठन और संघर्ष को अनिवार्य बताया गया।
सेमिनार को रजनी जोशी, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पी.सी. तिवारी, विजेता (परिवर्तनकामी छात्र संगठन), पिंकी गंगवार (इंकलाबी मजदूर केंद्र), पी.पी. आर्या (क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन), एक्टू नेता के.के. बोरा, आशा वर्कर कमला गुंज्याल, बसंती पाठक (उत्तराखंड महिला मंच), शारदा (प्रगतिशील भोजनमाता संगठन) सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं ने संबोधित किया।
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