देहरादून: देवभूमि की शांति भंग, सड़कों पर सरेआम ‘खूनी खेल’
उत्तराखंड की शांत वादियों और राजधानी देहरादून के पॉश इलाके राजपुर में सोमवार की सुबह उस वक्त थर्रा उठी, जब मामूली सड़क संघर्ष (Road Rage) ने एक वीभत्स हत्याकांड का रूप ले लिया। यह घटना केवल दो गुटों के बीच के विवाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने देश की सेवा कर चुके एक जांबाज सैन्य अधिकारी की बलि ले ली। ओवरटेकिंग विवाद (Overtaking Dispute) में बेलगाम अपराधियों द्वारा चलाई गई गोलियों ने मॉर्निंग वॉक पर निकले रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी (Retired Brigadier Mukesh Joshi) की जीवनलीला समाप्त कर दी। इस घटना ने राजधानी की कानून व्यवस्था और देहरादून पुलिस (Dehradun Police) की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
विवाद की जड़: रसूख और रफ्तार का उन्माद
घटना सोमवार सुबह लगभग 6:50 बजे की है, जब मसूरी रोड पर दिल्ली नंबर की एक फॉर्च्यूनर और एक स्कॉर्पियो के बीच आगे निकलने की होड़ शुरू हुई। रफ्तार के इस जुनून ने जल्द ही हिंसक मोड़ ले लिया। मालसी क्षेत्र के पास जोहड़ी गांव के मार्ग पर स्कॉर्पियो सवार युवकों ने अपना आपा खो दिया। आरोप है कि फॉर्च्यूनर को जबरन रुकवाने के लिए स्कॉर्पियो सवार अराजक तत्वों ने फिल्मी अंदाज में पीछा किया और चलती गाड़ी के टायरों को निशाना बनाकर अंधाधुंध फायरिंग (Firing) शुरू कर दी।
निर्दोश की मौत: जब रक्षक ही बन गया शिकार
अपराधियों का निशाना भले ही दूसरी कार थी, लेकिन उनकी एक घातक गोली सड़क किनारे शांति से टहल रहे 70 वर्षीय रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी को जा लगी। वह अधिकारी, जिन्होंने सीमा पर दुश्मनों का सामना किया और पीएमओ (PMO) व इंटेलिजेंस जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं में अपनी सेवाएं दीं, अपने ही शहर की सड़क पर सुरक्षित नहीं रह सके। लहूलुहान अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी की मौत (Death of Retired Brigadier) की खबर फैलते ही पूरे इलाके में शोक और दहशत की लहर दौड़ गई।
हिंसा का तांडव और पुलिस की सुस्ती
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, फायरिंग के बाद फॉर्च्यूनर कार अनियंत्रित होकर एक पेड़ से टकरा गई। इसके बावजूद हमलावरों का गुस्सा शांत नहीं हुआ; उन्होंने कार सवारों के साथ बेरहमी से मारपीट की और वाहन को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी अपनी स्कॉर्पियो सहित मौके से फरार होने में कामयाब रहे। घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल और एसपी सिटी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक अपराधी शहर की सीमाओं से ओझल हो चुके थे।
जनता का आक्रोश: ‘मित्र पुलिस’ के दावों की खुली पोल
अस्पताल पहुंचे एसएसपी देहरादून को स्थानीय निवासियों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। आक्रोशित लोगों ने आरोप लगाया कि राजपुर और आसपास के क्षेत्रों में गुंडागर्दी (Rowdyism) और नशे का कारोबार चरम पर है। निवासियों का कहना था कि पिछले 10 वर्षों से क्षेत्र में कोई सत्यापन (Verification) नहीं हुआ है और पुलिस की नाक के नीचे नशे का काला धंधा फल-फूल रहा है। लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि जब एक उच्च पदस्थ सैन्य अधिकारी सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक की सुरक्षा भगवान भरोसे है। ‘मित्र पुलिस’ की छवि पर उठते सवालों के बीच एसएसपी मौन खड़े जनता का उलाहना सुनते नजर आए।
कार्यवाही की स्थिति
फिलहाल, उत्तराखंड न्यूज (Uttarakhand News) के इस बड़े घटनाक्रम में पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और जिले की सीमाओं पर नाकेबंदी कर दी गई है। एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने आश्वासन दिया है कि अपराधियों को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। हालांकि, सवाल अब भी बरकरार है कि क्या राजधानी की सड़कें सुरक्षित हैं या फिर रफ्तार और रसूख का यह मेल निर्दोषों की जान लेता रहेगा? #JusticeForBrigadier की मांग के साथ देहरादून की जनता अब ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रही है।
