कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में हाईटेक निगरानी: ढेला रेस्क्यू सेंटर अब 60 आधुनिक कैमरों से लैस, मुख्यालय से होगी लाइव मॉनिटरिंग


रामनगर:कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) ने वन्यजीव संरक्षण और उनकी सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कॉर्बेट प्रशासन ने ढेला रेंज स्थित रेस्क्यू सेंटर को अत्याधुनिक ‘हाईटेक निगरानी प्रणाली’ (High-tech Surveillance System) से लैस कर दिया है। अब इस सेंटर में मौजूद आदमखोर या घायल बाघों और गुलदारों की हर हरकत पर रामनगर स्थित मुख्यालय से ही पैनी नजर रखी जा सकेगी।

दूरी की समस्या का तकनीकी समाधान

​कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने इस ऐतिहासिक पहल की जानकारी देते हुए बताया कि ढेला रेस्क्यू सेंटर और रामनगर स्थित मुख्य कार्यालय के बीच लगभग 18 से 20 किलोमीटर की दूरी है। पहले किसी भी आपात स्थिति या नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए अधिकारियों और प्रबंधन की टीम को बार-बार रेस्क्यू सेंटर का दौरा करना पड़ता था।

​समय और संसाधनों की इस चुनौती को देखते हुए पूरे रेस्क्यू सेंटर को तकनीकी रूप से अपग्रेड करने का निर्णय लिया गया। अब अत्याधुनिक कैमरा सिस्टम की लाइव फीड (Live Feed) सीधे मुख्यालय में उपलब्ध होगी, जिससे समय की बचत होगी और निगरानी की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

30 बाड़ों में तैनात हुए 60 ‘डिजिटल पहरेदार’

​रेस्क्यू सेंटर की विशालता और वहां मौजूद वन्यजीवों की संख्या को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। डॉ. बडोला के अनुसार:

  • ​वर्तमान में रेस्क्यू सेंटर में कुल 30 बाड़े मौजूद हैं।
  • ​इन बाड़ों में 14 टाइगर (बाघ) और 16 गुलदार (तेंदुए) रखे गए हैं।
  • ​प्रत्येक बाड़े की सटीक निगरानी के लिए दो-दो हाई क्वालिटी कैमरे लगाए गए हैं।
  • ​पूरे परिसर में कुल 60 कैमरे स्थापित किए गए हैं।

​बाड़ों के अलावा, सेंटर के प्रवेश द्वार (एंट्री गेट) और बाहरी परिसर में भी कैमरे लगाए गए हैं ताकि बाहरी घुसपैठ या किसी भी अन्य सुरक्षा चूक को पूरी तरह से रोका जा सके।

स्वास्थ्य और व्यवहार पर विशेष नजर

​इस हाईटेक सिस्टम का सबसे बड़ा लाभ वन्यजीवों के स्वास्थ्य प्रबंधन में मिलेगा। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बाघ और गुलदार जैसे जानवर इंसानी मौजूदगी में अपना स्वाभाविक व्यवहार बदल देते हैं। कैमरों के जरिए मुख्यालय से अधिकारी यह देख पाएंगे कि वन्यजीव प्राकृतिक रूप से कैसा व्यवहार कर रहे हैं, वे सही से भोजन कर रहे हैं या नहीं, और क्या उन्हें किसी चिकित्सीय सहायता की तत्काल आवश्यकता है।

​निदेशक डॉ. साकेत बडोला का मानना है कि इस व्यवस्था से किसी भी आपात स्थिति में रिस्पॉन्स टाइम (Response Time) बहुत कम हो जाएगा। यदि कोई वन्यजीव अस्वस्थ दिखता है, तो मुख्यालय से ही पशु चिकित्सक उसे देखकर प्रारंभिक परामर्श दे सकेंगे।

वन्यजीव संरक्षण में मील का पत्थर

​कॉर्बेट प्रशासन की यह पहल देश के अन्य टाइगर रिजर्व के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है। वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों ने इस कदम की सराहना की है। उनका कहना है कि तकनीक और संरक्षण का यह मेल न केवल सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाएगा, बल्कि हिंसक वन्यजीवों और मानवों के बीच के संघर्ष को प्रबंधित करने में भी मदद करेगा।

​इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का रेस्क्यू सेंटर देश के सबसे सुरक्षित और आधुनिक निगरानी वाले केंद्रों में शुमार हो गया है। डिजिटल मॉनिटरिंग के इस युग में, ढेला रेस्क्यू सेंटर अब वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित आश्रय और बेहतर उपचार केंद्र के रूप में उभर रहा है।

​रामनगर का ढेला रेस्क्यू सेंटर अब केवल एक बाड़ा नहीं, बल्कि तकनीक से संचालित एक आधुनिक निगरानी केंद्र बन गया है। डॉ. साकेत बडोला के नेतृत्व में कॉर्बेट प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम वन्यजीव प्रबंधन में पारदर्शिता और तत्परता लाने का काम करेगा। 24 घंटे चलने वाली यह तीसरी आंख अब कॉर्बेट के ‘राजाओं’ की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *