रुद्रपुर: मर्यादा की आड़ में अनैतिकता का खेल, प्रशासन ने चलाया ‘ऑपरेशन क्लीन’
रुद्रपुर। देवभूमि की शांत वादियों और औद्योगिक शहर रुद्रपुर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शहर के एक प्रतिष्ठित मॉल में संचालित स्पा सेंटर छापेमारी की गाज गिरी। एसएसपी अजय गणपति के कड़े निर्देशों के बाद पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने अचानक धावा बोल दिया। यह कार्रवाई इतनी गोपनीय और त्वरित थी कि अवैध गतिविधि में लिप्त संचालकों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। मॉल के भीतर भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई और चारों ओर प्रशासन की सख्ती की चर्चा होने लगी।
ताले टूटे, राज खुले: जब ग्राइंडर से कटी ‘सुरक्षा’ की जंजीरें
छापेमारी की सूचना जंगल में आग की तरह फैलते ही कई स्पा सेंटर संचालक अपने शटर गिराकर और ताले जड़कर रफूचक्कर हो गए। उन्हें लगा कि बंद दरवाजों के पीछे उनके राज सुरक्षित रहेंगे, लेकिन उत्तराखंड पुलिस और मजिस्ट्रेट की टीम ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई। जब संचालकों ने सहयोग नहीं किया, तो प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए मौके पर ग्राइंडर मशीनें मंगवाईं। शोर करती मशीनों ने जैसे ही लोहे के ताले काटे, भीतर का नजारा चौंकाने वाला था।

बंद दरवाजों के भीतर कई युवक और युवतियां संदिग्ध परिस्थितियों में मौजूद मिले। पुलिस ने मौके पर ही सभी से सघन पूछताछ की और उनके वहां होने के ठोस कारणों की पड़ताल की। रुद्रपुर की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया कि बंद कमरों के भीतर नियमों को ताक पर रखकर जो खेल चल रहा था, उस पर अब कानून का पहरा बैठ चुका है।
नियमों की धज्जियां और दस्तावेजी फर्जीवाड़ा
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले हैं। अधिकांश सेंटरों के पास न तो वैध लाइसेंस थे और न ही रजिस्ट्रेशन के अनिवार्य दस्तावेज। फायर सेफ्टी से लेकर लेबर कानूनों तक, हर मोर्चे पर नियमों का खुला उल्लंघन पाया गया। अवैध गतिविधि की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल भारी भरकम चालानी कार्रवाई की। जिन सेंटरों के ताले तोड़े गए थे, वहां भविष्य में किसी भी छेड़छाड़ या दोबारा संचालन को रोकने के लिए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
स्थायी समाधान पर उठते यक्ष प्रश्न
इस स्पा सेंटर छापेमारी ने एक पुराने जख्म को फिर से कुरेद दिया है। स्थानीय जनता का आक्रोश अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा रहा है। लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इन सेंटरों पर ताले लगे हैं। सवाल यह है कि आखिर बार-बार सील होने के बावजूद ये सेंटर कुछ ही दिनों में फिर से कैसे गुलजार हो जाते हैं? क्या इन संचालकों को किसी सफेदपोश का संरक्षण प्राप्त है, या फिर विभागीय मिलीभगत के चलते यह अवैध कारोबार दोबारा पनप जाता है?

एसएसपी अजय गणपति की इस कार्रवाई से अपराधियों में खौफ जरूर है, लेकिन जनता को अब केवल ‘छापेमारी’ नहीं, बल्कि ‘स्थायी तालाबंदी’ चाहिए। प्रशासन की सख्ती का असर तभी दिखेगा जब इन अनैतिक अड्डों को हमेशा के लिए जमींदोज कर दिया जाए।
क्या अब बदलेगी तस्वीर?
रुद्रपुर के मॉल में हुई इस कार्रवाई ने साफ संकेत दिया है कि अगर नियम तोड़े गए, तो अंजाम बुरा होगा। लेकिन भविष्य की चुनौती बड़ी है। क्या पुलिस की यह सक्रियता स्थायी रहेगी? क्या रुद्रपुर के इन स्पा सेंटरों को फिर से अनैतिकता का अड्डा बनने से रोका जा सकेगा? फिलहाल, प्रशासन की इस कार्रवाई ने शहर के अन्य अवैध व्यापार करने वालों की नींद उड़ा दी है। अब देखना यह होगा कि यह ‘शुद्धिकरण अभियान’ आने वाले दिनों में क्या नया मोड़ लेता है।
