कार्बेट टाइगर रिजर्व: ढेला रेस्क्यू सेंटर में सबसे उम्रदराज नर बाघ की मौत, 20 साल की उम्र में ली अंतिम सांस


रामनगर (नैनीताल): विश्व प्रसिद्ध कार्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला रेंज स्थित रेस्क्यू सेंटर से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक दुखद खबर सामने आई है। यहाँ लंबे समय से रह रहे एक नर बाघ की वृद्धावस्था के कारण मृत्यु हो गई है। वन्यजीव विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस बाघ की उम्र लगभग 20 वर्ष आंकी गई है, जो बाघों की प्राकृतिक जीवन प्रत्याशा के लिहाज से काफी अधिक है।

ढेला रेस्क्यू सेंटर में ली अंतिम सांस

प्रेस नोट के अनुसार, 02 मई 2026 की रात्रि को ढेला रेंज स्थित रेस्क्यू सेंटर में इस नर बाघ ने अंतिम सांस ली। प्रथम दृष्टया जांच में पाया गया कि बाघ ने अपनी वृद्धावस्था पूर्ण कर ली थी, जिस कारण उसके शरीर के अंगों ने धीरे-धीरे काम करना बंद कर दिया था। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि 20 साल की उम्र किसी भी बाघ के लिए काफी लंबी मानी जाती है।

फोटो,बाघ के शव को जलाकर नष्ट करते हुए।

ढिकाला से शुरू हुआ था इस बाघ का सफर

इस नर बाघ का इतिहास काफी संघर्षपूर्ण रहा है। इसे 15 नवंबर 2019 को कार्बेट टाइगर रिजर्व की प्रसिद्ध ढिकाला रेंज से रेस्क्यू किया गया था। रेस्क्यू के बाद बेहतर स्वास्थ्य देखभाल के लिए इसे नैनीताल जू (चिड़ियाघर) भेजा गया था। इसके बाद, 20 अप्रैल 2021 को बाघ को नैनीताल जू से स्थानांतरित कर ढेला रेंज स्थित रेस्क्यू सेंटर लाया गया, जहाँ वह लगातार विशेषज्ञों की देखरेख में था।

कैंसर जैसे ट्यूमर को दी थी मात

यह बाघ अपनी जीवटता के लिए भी जाना जाता था। वर्ष 2025 में, जब यह बाघ काफी वृद्ध हो चुका था, इसके शरीर में एक ट्यूमर पाया गया था। वन्यजीव चिकित्सकों की टीम ने उस समय बाघ का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया था। इस ऑपरेशन के बाद बाघ के स्वास्थ्य में सुधार हुआ था और वह तब से रेस्क्यू सेंटर में सुरक्षित जीवन व्यतीत कर रहा था।

वरिष्ठ डॉक्टरों के पैनल ने किया पोस्टमार्टम

बाघ की मृत्यु के बाद, आज 03 मई 2026 को नियमानुसार पशु चिकित्साधिकारियों की एक टीम द्वारा पोस्टमार्टम किया गया। इसके लिए एक विशेष पैनल गठित किया गया था, जिसमें कार्बेट टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा और नैनीताल जू के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. हिमांशु पांगती शामिल थे। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी तरह से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के मानकों के अनुरूप पूरी की गई।

अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ अंतिम संस्कार

पोस्टमार्टम की कार्यवाही के दौरान वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मौके पर राहुल मिश्रा (उप निदेशक, कार्बेट टाइगर रिजर्व), अमित कुमार ग्वासीकोटी (उप प्रभागीय वनाधिकारी, कालागढ़), भानु प्रकाश हर्बोला (वन क्षेत्राधिकारी, ढेला) और कुंदन सिंह खाती (सेवानिवृत्त उप प्रभागीय वनाधिकारी एवं NTCA प्रतिनिधि) उपस्थित थे। साथ ही विश्व प्रकृति निधि (WWF) और द कार्बेट फाउंडेशन के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

​सिद्धार्थ रावत (वन दरोगा) एवं ढेला रेंज के अन्य कर्मचारियों की मौजूदगी में मौका पंचनामा तैयार किया गया। पोस्टमार्टम के उपरांत, NTCA के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बाघ के सभी अंगों की पुष्टि की गई और शव को सबके सामने विधिवत जलाकर नष्ट कर दिया गया।

​कार्बेट टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का कहना है कि इस वृद्ध बाघ की मृत्यु पार्क के लिए एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन उसने एक लंबा और चुनौतीपूर्ण जीवन जिया।

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