देहरादून: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12वीं के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए हैं। परिणाम जारी होते ही जहां सफल छात्रों के चेहरे खिल उठे हैं, वहीं उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों को कवर करने वाले देहरादून रीजन के लिए इस बार के आंकड़े चिंताजनक रहे हैं। कभी ‘एजुकेशन सिटी’ के रूप में विख्यात देहरादून अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख खोता नजर आ रहा है। सीबीएसई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देहरादून रीजन देश के कुल 22 रीजन की सूची में 17वें स्थान पर पिछड़ गया है।
22 रीजन की दौड़ में 17वां स्थान
सीबीएसई द्वारा जारी राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों ने देहरादून रीजन की शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के प्रदर्शन पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। एक समय था जब देहरादून रीजन टॉप 10 में अपनी जगह बनाए रखता था, लेकिन इस बार यह 17वें पायदान पर जा गिरा है। आंकड़ों के अनुसार, देहरादून रीजन का कुल पास प्रतिशत मात्र 81.42% दर्ज किया गया है। इसकी तुलना अगर दक्षिण भारत के त्रिवेंद्रम रीजन से की जाए, जो 95.62% के साथ देश में पहले स्थान पर रहा है, तो देहरादून का परिणाम लगभग 14% कम है। यह अंतर दर्शाता है कि पहाड़ी राज्यों और मैदानी क्षेत्रों के समन्वय वाले इस रीजन में शैक्षणिक गुणवत्ता को लेकर गंभीर मंथन की आवश्यकता है।
परीक्षा आयोजन और मूल्यांकन
सीबीएसई ने इस वर्ष 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू कर 10 अप्रैल के बीच संपन्न कराई थीं। परीक्षा के सफल आयोजन के बाद बोर्ड ने रिकॉर्ड समय में उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरा किया और आधिकारिक वेबसाइट पर परिणाम घोषित किए। देहरादून रीजन के अंतर्गत इस वर्ष कुल 1,285 स्कूलों ने परीक्षा प्रक्रिया में भाग लिया था। इन स्कूलों के हजारों छात्रों के लिए रीजन में कुल 480 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।
छात्रों के मुकाबले छात्राओं ने फहराया परचम
हर साल की तरह इस बार भी परीक्षा परिणामों में ‘आधी आबादी’ का दबदबा देखने को मिला। देहरादून रीजन में कुल 97,012 छात्रों ने 12वीं की परीक्षा दी थी। लिंग आधारित आंकड़ों पर गौर करें तो:
- कुल बालक (Boys): 54,172
- कुल बालिकाएं (Girls): 42,840
प्रदर्शन की बात करें तो छात्राओं का पास प्रतिशत 85.84% रहा, जबकि छात्रों (बालकों) का सफलता प्रतिशत केवल 77.92% रहा। छात्राओं ने छात्रों के मुकाबले लगभग 8 प्रतिशत बेहतर प्रदर्शन कर अपनी शैक्षणिक क्षमता को सिद्ध किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्राओं में पढ़ाई के प्रति अनुशासन और समर्पण अधिक होता है, जो उनके परीक्षा परिणामों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ने के क्या हैं कारण?
देहरादून रीजन का 17वें स्थान पर पहुंचना शिक्षाविदों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उत्तराखंड अपनी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और शिक्षा के प्रति जागरूकता के लिए जाना जाता है, लेकिन सीबीएसई के इस परिणाम ने बुनियादी शिक्षा और परीक्षा की तैयारी के स्तर पर कई कमियों को उजागर किया है। जानकारों का कहना है कि शिक्षकों की कमी, छात्रों का डिजिटल भटकाव और परीक्षा के बदलते पैटर्न के साथ तालमेल न बिठा पाना इस गिरावट के मुख्य कारण हो सकते हैं।
छात्र अपना रिजल्ट यहाँ चेक करें
जो छात्र अभी तक अपना परिणाम नहीं देख पाए हैं, वे निम्नलिखित आधिकारिक वेबसाइटों पर जाकर रोल नंबर और स्कूल कोड दर्ज कर अपनी मार्कशीट देख सकते हैं:
इसके अलावा छात्र मोबाइल ऐप DigiLocker और UMANG के जरिए भी अपना डिजिटल सर्टिफिकेट डाउनलोड कर सकते हैं।
भविष्य की राह और सुधार की जरूरत
सीबीएसई 12वीं के इन परिणामों ने जहां हजारों छात्रों के भविष्य के द्वार खोले हैं, वहीं देहरादून रीजन के शिक्षा प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी है। अगर समय रहते शैक्षणिक ढांचे में सुधार नहीं किया गया और छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन उपलब्ध नहीं कराया गया, तो आने वाले वर्षों में रैंकिंग में और गिरावट देखने को मिल सकती है। अब समय आ गया है कि स्कूल और अभिभावक मिलकर छात्रों के प्रदर्शन पर गंभीरता से काम करें, ताकि देहरादून फिर से शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पुरानी पहचान वापस पा सके।
