देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में नर्सिंग भर्ती और विभिन्न लंबित मांगों को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब कानूनी कार्रवाई की जद में आ गया है। पुलिस ने उत्तराखंड महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला समेत कई प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। यह पूरी कार्रवाई कोतवाली डालनवाला में संपन्न हुई है, जिसमें सरकारी कार्य में बाधा डालने और कानून-व्यवस्था के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।
क्या था पूरा मामला? पानी की टंकी पर चढ़े प्रदर्शनकारी
मामला 11 मई से शुरू हुआ था, जब नर्सिंग बेरोजगार संगठन के सदस्य और महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला अपनी मांगों को लेकर आक्रामक रुख अपनाते हुए परेड ग्राउंड स्थित पेयजल विभाग की पानी की टंकी पर चढ़ गए थे। यह क्षेत्र प्रतिबंधित घोषित है, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने के लिए इस स्थान को चुना।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने घंटों तक प्रदर्शनकारियों को समझाने और नीचे उतारने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी जिद पर अड़े रहे। टंकी के नीचे मौजूद नर्सिंग बेरोजगार संगठन के अन्य समर्थकों ने भी भारी नारेबाजी की और धरना प्रदर्शन जारी रखा। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, वे पीछे नहीं हटेंगे।

12 मई का हाई-वोल्टेज ड्रामा और आत्मदाह की धमकी
12 मई को इस प्रदर्शन ने और भी गंभीर रूप ले लिया। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान ज्योति रौतेला ने खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने की धमकी दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उन्होंने माचिस तक निकाल ली थी, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने बड़ी मुश्किल से उन्हें शांत किया और इस तरह का आत्मघाती कदम न उठाने की अपील की। इस दौरान प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए थे, क्योंकि मामला सीधे तौर पर जानमाल की सुरक्षा से जुड़ गया था।
वहीं दूसरी तरफ, नर्सिंग एकता मंच और अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर चक्का जाम कर दिया। इस जाम की वजह से देहरादून की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। ईसी रोड और परेड ग्राउंड के आसपास के इलाकों में घंटों तक वाहनों की कतारें लगी रहीं। हालांकि, बाद में शासन से मिले आश्वासन के बाद सड़क को खुलवाया गया।
पुलिस की कड़ी कार्रवाई: इन धाराओं में फंसी ज्योति रौतेला
प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों की मांगों का प्रस्ताव शासन को भेजा, जिसके बाद 13 मई को ज्योति रौतेला अपने चार साथियों के साथ पानी की टंकी से नीचे उतरीं। हालांकि, पुलिस ने इस पूरे प्रकरण को गैर-कानूनी मानते हुए सख्त कार्रवाई की है।
कोतवाली डालनवाला में मु0अ0सं0 74/2026 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 126(2), 221, 223, 226, 292, 329(3) और पेट्रोलियम अधिनियम की धारा 23 शामिल की गई है। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने न केवल सरकारी कार्य में बाधा डाली, बल्कि आत्मदाह जैसी धमकी देकर सार्वजनिक शांति भंग करने का प्रयास किया।
प्रशासनिक रुख और सुरक्षा व्यवस्था
पुलिस प्रशासन का रुख अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का अधिकार सबको है, लेकिन प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करना, पेट्रोल जैसे ज्वलनशील पदार्थ का सार्वजनिक प्रदर्शन करना और आम जनता का रास्ता रोकना अपराध की श्रेणी में आता है। पेट्रोल का प्रयोग सुरक्षा की दृष्टि से बेहद गंभीर मामला माना गया है, इसीलिए पेट्रोलियम अधिनियम की धाराओं को भी मुकदमे में जोड़ा गया है।
वर्तमान में, पुलिस मामले की छानबीन कर रही है और सीसीटीवी फुटेज व अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी में है। नर्सिंग बेरोजगारों के इस आंदोलन ने एक बार फिर उत्तराखंड में भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर उठ रहे सवालों और उस पर होने वाली राजनीति को हवा दे दी है।
