भीमताल में पिंजरे में कैद हुआ खूंखार गुलदार, दो लोगों की मौत के बाद ग्रामीणों ने ली राहत की सांस


भीमताल और जौलीकोट में गुलदार का आतंक: मोरा गांव में पिंजरे में फंसा गुलदार, जांच में जुटा वन विभाग

नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के भीमताल और जौलीकोट क्षेत्रों में पिछले लंबे समय से जारी गुलदार की दहशत के बीच मंगलवार सुबह राहत भरी खबर आई है। भीमताल ब्लॉक के मोरा गांव में वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में एक गुलदार कैद हो गया है। बीते 15 दिनों के भीतर दो लोगों को अपना निवाला बनाने वाले गुलदार की सक्रियता से पूरे क्षेत्र में मातम और डर का माहौल था। हालांकि, विभाग अभी इस बात की पुष्टि करने में जुटा है कि क्या यह वही आदमखोर गुलदार है जिसने हालिया घटनाओं को अंजाम दिया।

पिंजरे में कैद गुलदार

पिंजरे में कैद हुआ गुलदार, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस भीमताल क्षेत्र में गुलदार की दस्तक के बाद से ग्रामीण अपने घरों में कैद होने को मजबूर थे। मंगलवार सुबह जैसे ही मोरा गांव के पास लगाए गए पिंजरे में गुलदार के फंसने की सूचना मिली, बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां एकत्र हो गए। पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र में गुलदार की गतिविधियां अत्यधिक बढ़ गई थीं। विशेष रूप से भदयूनी गांव में 6 दिन पहले कमल सिंह बिष्ट नामक युवक को गुलदार ने अपना शिकार बनाया था, जिसके बाद से ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर था और वन विभाग पर गुलदार को पकड़ने का भारी दबाव बना हुआ था।

आदमखोर होने की होगी पुष्टि पकड़े गए गुलदार को लेकर वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) नितिन पंत ने बताया कि फिलहाल गुलदार को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पकड़ा गया गुलदार ही वह आदमखोर है जिसने क्षेत्र में जानलेवा हमले किए हैं। विशेषज्ञ टीम गुलदार के व्यवहार, शारीरिक बनावट और उसके दांतों की स्थिति का बारीकी से अध्ययन करेगी। साथ ही, हालिया घटनाओं के शिकार लोगों के पास मिले साक्ष्यों से इसका मिलान किया जाएगा। विभाग इसके डीएनए सैंपल भी एकत्र कर रहा है ताकि वैज्ञानिक आधार पर पुष्टि की जा सके।

भीमताल में घटनाओं का सिलसिला भीमताल ब्लॉक के सूर्याजाला, भदयूनी और जौलीकोट क्षेत्रों में गुलदार के हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। 3 अप्रैल को सूर्या गांव की हंसी देवी को गुलदार ने अपना शिकार बनाया था, जो नेशनल लेवल के खो-खो खिलाड़ियों की मां थीं। इस घटना के बाद से ही क्षेत्र में दहशत फैल गई थी। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि सुरक्षा के मद्देनजर जिला मजिस्ट्रेट को 25 और 27 अप्रैल को स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित करना पड़ा था।

अब तक पकड़े गए 8 गुलदार गौरतलब है कि भीमताल का धारी और आसपास का इलाका गुलदार के हमलों का हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक इस पूरे बेल्ट से 8 गुलदार पिंजरे में कैद किए जा चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में गुलदारों की सक्रियता ने पारिस्थितिक असंतुलन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं।

वन विभाग की अपील: अभी खतरा टला नहीं गुलदार के पकड़े जाने के बावजूद वन विभाग ने स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। रेंजर नितिन पंत के अनुसार, क्षेत्र में अन्य गुलदारों की मौजूदगी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शाम ढलने के बाद अकेले बाहर न निकलें, विशेषकर बच्चों और मवेशियों की सुरक्षा का ध्यान रखें। विभाग की गश्त अभी भी जारी रहेगी और संवेदनशील इलाकों में थर्मल कैमरों से निगरानी की जा रही है।

​फिलहाल, पकड़े गए गुलदार को रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर या किसी अन्य सुरक्षित डिपो में भेजने की तैयारी की जा रही है, जहां उसकी पूरी मेडिकल जांच संपन्न होगी। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस आदमखोर के पकड़े जाने के बाद उनके जीवन में फिर से सामान्य स्थिति लौट पाएगी।

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