उत्तरकाशी:उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा के बीच गंगोत्री धाम से रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ गंगा नदी के तेज बहाव और उफनती लहरों के बीच एक 77 वर्षीय बुजुर्ग श्रद्धालु का पैर फिसल गया, जिससे वह नदी की मुख्य धारा में तेजी से बहने लगे। मौत के मुहाने पर खड़े इस बुजुर्ग के लिए वहाँ तैनात राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) का एक जवान देवदूत बनकर सामने आया। SDRF के इस जांबाज जवान ने अपनी जान की परवाह न करते हुए उफनती भागीरथी नदी में छलांग लगा दी और बुजुर्ग यात्री को सकुशल बाहर निकाल लिया।
इस घटना के बाद जहाँ एक तरफ जवान के साहस की चौतरफा तारीफ हो रही है, वहीं दूसरी तरफ गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहितों का गुस्सा प्रशासन पर फूट पड़ा है। पुरोहितों ने सिंचाई विभाग और स्थानीय प्रशासन पर सुरक्षा व्यवस्था और घाटों के निर्माण कार्य में घोर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
पैर फिसलने से भागीरथी के रौद्र रूप में बहे बुजुर्ग श्रद्धालु
मिली जानकारी के अनुसार, इन दिनों चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ गंगोत्री धाम पहुँच रही है। मुख्य मंदिर के पास स्थित गंगा स्नान घाट पर देश के विभिन्न कोनों से आए तीर्थयात्री आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। इसी दौरान एक 77 वर्षीय बुजुर्ग श्रद्धालु जब गंगा स्नान करने के लिए घाट पर उतरे, तो काई और अत्यधिक फिसलन के कारण उनका पैर अचानक अनियंत्रित होकर फिसल गया।
पहाड़ों में हो रही बर्फबारी और लगातार बारिश के कारण इन दिनों भागीरथी नदी का जलस्तर काफी बढ़ा हुआ है और पानी का बहाव बेहद तीव्र है। पैर फिसलते ही बुजुर्ग श्रद्धालु खुद को संभाल नहीं पाए और पलक झपकते ही नदी की मुख्य और तेज धारा की चपेट में आकर बहने लगे। घाट पर मौजूद अन्य यात्रियों में यह भयावह दृश्य देखकर चीख-पुकार मच गई।
जांबाज SDRF जवान नवीन पोखरियाल ने पेश की बहादुरी की मिसाल
बुजुर्ग को नदी में डूबता और बहता देख वहाँ सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात SDRF के जवान नवीन पोखरियाल ने एक सेकंड का भी वक्त नहीं गंवाया। उन्होंने न तो अपनी जान की परवाह की और न ही नदी के जानलेवा वेग की। जवान नवीन ने तुरंत उफनती नदी में छलांग लगा दी। पानी के तेज थपेड़ों से मुकाबला करते हुए वह तैरकर बुजुर्ग यात्री तक पहुँचे और उन्हें मजबूती से पकड़ लिया।
इसके बाद बेहद सूझबूझ और अदम्य साहस का परिचय देते हुए जवान ने बुजुर्ग को सुरक्षित नदी के किनारे पहुँचाया, जहाँ अन्य साथियों की मदद से उन्हें पानी से बाहर निकाला गया। समय रहते मिली इस त्वरित मदद की वजह से 77 वर्षीय श्रद्धालु की जान बचाई जा सकी। इस रेस्क्यू ऑपरेशन को जिसने भी देखा, उसने दांतों तले उंगली दबा ली।

गंगा पुरोहितों ने जवान को किया सम्मानित, प्रशासन पर लगाया लापरवाही का आरोप
SDRF जवान नवीन पोखरियाल की इस अदम्य वीरता और कर्तव्यनिष्ठा को देखकर गंगोत्री मंदिर समिति के गंगा पुरोहित गदगद हो उठे। मंदिर समिति और तीर्थ पुरोहितों ने सामूहिक रूप से जवान नवीन पोखरियाल की जमकर सराहना की और उन्हें सम्मानित किया। पुरोहितों का कहना है कि अगर जवान मुस्तैद न होता, तो आज गंगोत्री धाम में एक बड़ी अनहोनी हो जाती।
हालांकि, इस हादसे के बाद तीर्थ पुरोहितों का गुस्सा उत्तराखंड प्रशासन और सिंचाई विभाग पर फूट पड़ा। गंगोत्री के वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित संजीव सेमवाल सहित अन्य पुरोहितों ने सिंचाई विभाग, उत्तरकाशी पर गंभीर आरोप मढ़े हैं। पुरोहितों ने कहा कि विभाग ने यात्रा सीजन शुरू होने से पहले गंगोत्री धाम के गंगा घाटों पर सुरक्षित स्नान घाटों का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं कराया। घाटों पर सुरक्षात्मक इंतजाम न होने और कार्य अधूरा रहने के कारण यहाँ लगातार ऐसे हादसे हो रहे हैं। पुरोहितों ने कड़ी चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम नहीं किए, तो आगे भी बड़े हादसे हो सकते हैं।
पुलिस-प्रशासन की अपील: लोटे या मग से करें स्नान, नदी में न उतरें यात्री
इस संवेदनशील हादसे और भागीरथी नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए उत्तरकाशी पुलिस-प्रशासन बेहद सतर्क हो गया है। पुलिस प्रशासन ने देश-विदेश से आ रहे सभी श्रद्धालुओं एवं तीर्थयात्रियों से अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की पुरजोर अपील की है।
उत्तरकाशी पुलिस द्वारा जारी सुरक्षा दिशा-निर्देशों में कहा गया है:
- वर्तमान परिस्थितियों और पहाड़ों में हो रहे मौसम बदलाव के कारण भागीरथी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
- सभी श्रद्धालु गंगा घाटों के किनारों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से एक सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
- नदी की मुख्य धारा में उतरकर सीधे स्नान करने का प्रयास बिल्कुल न करें, क्योंकि पत्थरों पर फिसलन और पानी का वेग जानलेवा साबित हो सकता है।
- श्रद्धालु सुरक्षा के लिहाज से घाट पर रखे लोटे अथवा मग के माध्यम से गंगाजल लेकर सुरक्षित स्थान पर ही स्नान करें।
पुलिस ने साफ तौर पर कहा है कि आपकी यात्रा को सुखद और सुरक्षित बनाने के लिए श्रद्धालुओं की सतर्कता और स्थानीय प्रशासन का सहयोग ही सबसे महत्वपूर्ण है। यात्री किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।