NEET Paper Leak: रुद्रपुर और काशीपुर में फूटा गुस्सा, छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में फूंका पुतला; शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
उत्तराखंड (काशीपुर/रुद्रपुर): दिल्ली में संसद मार्च के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज और दुर्व्यवहार के खिलाफ उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले में जबरदस्त जन-आक्रोश देखने को मिल रहा है। नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन अब और तेज हो गया है। काशीपुर और रुद्रपुर में मजदूर संगठनों, छात्र समर्थकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार का पुतला फूंका और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग की।
पेपर लीक के कारण जान गंवाने वाले 21 छात्रों को दी श्रद्धांजलि
रुद्रपुर के स्थानीय गांधी पार्क में ‘श्रमिक संयुक्त मोर्चा उधमसिंह नगर’ के बैनर तले विशाल प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत नीट पेपर लीक के तनाव के चलते आत्महत्या करने वाले 21 असहाय छात्रों की याद में 2 मिनट का मौन रखकर की गई।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि पेपर लीक और अनिश्चित भविष्य के कारण छात्रों की मौतें आत्महत्याएं नहीं, बल्कि भ्रष्ट शिक्षा तंत्र और सरकार की नाकामी से हुई ‘संस्थागत हत्याएं’ हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) लगातार एक के बाद एक परीक्षाओं के पेपर लीक होने से रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है, जिसके कारण देश के लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।

20 जुलाई के संसद मार्च में पुलिस बर्बरता का आरोप
काशीपुर के क्षत्रिय चौराहे पर ‘इंकलाबी मजदूर केंद्र’, ‘प्रगतिशील महिला एकता केंद्र’ और ‘क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन’ के कार्यकर्ताओं ने पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया।
इंकलाबी मजदूर केंद्र के सचिव पंकज ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि 20 जून से छात्र पेपर लीक के विरोध में और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे। 20 जुलाई को जब देश भर से आए हजारों छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर संसद की ओर मार्च कर रहे थे, तब दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज किया।
आरोप लगाया गया कि पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों की वर्दी पर नेम प्लेट तक नहीं थी, जो सरकार की साजिशन कार्रवाई की तरफ इशारा करता है। प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना है कि छात्रों को बदनाम करने और आंदोलन को उपद्रवी साबित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने मौके पर पत्थरों से भरे ट्रक और जली हुई गाड़ियां खड़ी करवाई थीं।

‘काले अंग्रेजों’ जैसी हरकत कर रही सरकार: वक्ता
क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के पी. पी. आर्या ने कहा, “जिस तरह कभी ब्रिटिश हुकूमत में अंग्रेजों ने भारतीय नागरिकों के लोकतांत्रिक आंदोलनों का दमन किया था, ठीक उसी तरह आज की सरकार भी ‘काले अंग्रेजों’ की तरह जनता की आवाज दबा रही है। हमें अपने लोकतांत्रिक और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक होकर सड़कों पर संघर्ष करना होगा।”
श्रमिक नेताओं ने आरोप लगाया कि संसद से कुछ ही दूरी पर महिला पुलिस बलों के अभाव में पुरुष पुलिसकर्मियों ने छात्राओं के साथ अभद्रता की और उनके कपड़े तक फाड़ दिए, जिसने पूरे देश का सिर शर्म से झुका दिया है।
विभिन्न संगठनों का मिला व्यापक समर्थन
दोनों स्थानों पर हुए प्रदर्शनों में विभिन्न ट्रेड यूनियनों, किसान संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में भाग लिया। रुद्रपुर में कार्यक्रम को श्रमिक संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष दिनेश तिवारी, सीएसटीयू के महासचिव मुकुल श्री, इंकलाबी मजदूर केंद्र के कैलाश भट्ट, मासा से धीरज जोशी, पीपीआईडी के हरीश मौर्य, भगवती श्रमिक संगठन के ठाकुर सिंह, किसान नेता परविंदर सिंह तथा विभिन्न औद्योगिक यूनियनों के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया।
वहीं काशीपुर में पी. पी. आर्या, पंकज, ममता, शोभा, आरती समेत बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों और कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर आंदोलन को तेज करने का संकल्प लिया।
प्रदर्शनकारियों ने एक सुर में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि नीट पेपर लीक की जवाबदेही तय नहीं की जाती, जिम्मेदार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं लिया जाता और लाठीचार्ज करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह आंदोलन देशव्यापी रूप लेगा।