खटीमा (उधम सिंह नगर):उत्तराखंड भाषा संस्थान में खटीमा के वरिष्ठ साहित्यकार और भाषाविद डॉ. जगदीश पंत ‘कुमुद’ को सदस्य के रूप में नामित किया गया है। शासन के भाषा विभाग द्वारा जारी इस निर्णय के बाद से ही सीमांत क्षेत्र खटीमा और पूरे उधम सिंह नगर जिले के साहित्यिक तथा शैक्षणिक हलकों में उत्साह का माहौल है। उनकी इस उपलब्धि को राज्य में क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
डॉ. जगदीश पंत ‘कुमुद’ का साहित्यिक सफर अत्यंत समृद्ध और प्रेरणादायी रहा है। वे वर्तमान में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चकरपुर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। चिकित्सीय दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने के साथ-साथ वे दशकों से साहित्य सृजन और भाषाई अध्ययन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। साहित्य की विभिन्न विधाओं में अब तक उनकी छह प्रमुख पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिन्हें पाठकों और समीक्षकों द्वारा खूब सराहा गया है।
हाल ही में प्रकाशित उनका आत्मकथात्मक उपन्यास ‘समय से संलाप’ देश के साहित्यिक परिदृश्य में खासा चर्चा में रहा है। इस कृति में उन्होंने जीवन के अनुभवों, सामाजिक सरोकारों और भाषाई बारीकियों को बेहद आत्मीय ढंग से प्रस्तुत किया है। इसके अतिरिक्त, देश की कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में उनकी कहानियां, लघुकथाएं, समकालीन कविताएं और शोधपरक लेख लगातार प्रकाशित होते रहे हैं।
बुक्सा जनजाति की भाषा पर विशेष शोध
डॉ. पंत की पहचान केवल एक कुशल लेखक या कवि तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने उत्तराखंड की संकटग्रस्त लोक बोलियों और जनजातीय भाषाओं पर व्यापक शोध कार्य किया है। विशेष रूप से तराई क्षेत्र में निवास करने वाली बुक्सा जनजाति की बोली-भाषा पर उनका शोध कार्य मील का पत्थर माना जाता है। उन्होंने बुक्सा समुदाय की भाषाई संरचना, शब्दावली और सांस्कृतिक धरोहर को दस्तावेज के रूप में सुरक्षित करने के लिए वर्षों तक काम किया है। उनके इस अनूठे भाषाई योगदान के चलते उन्हें राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर अलग पहचान मिली है।
उनकी इन्हीं दीर्घकालिक साहित्यिक और भाषाई सेवाओं को रेखांकित करते हुए इसी वर्ष उन्हें उत्तराखंड के राज्यपाल, राज्य के भाषा मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री द्वारा विशेष रूप से सम्मानित भी किया जा चुका है।
साहित्यिक और राजनीतिक हलकों में खुशी की लहर
उत्तराखंड भाषा संस्थान में उनका मनोनयन होने की सूचना मिलते ही क्षेत्र के प्रबुद्ध वर्ग और जनप्रतिनिधियों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। बधाई देने वालों में प्रोफेसर सिद्धेश्वर सिंह, डॉ. रूप चंद्र शास्त्री, कमल जिंदल, रंजीत सिंह नामधारी, प्रेम सिंह राणा, वरुण अग्रवाल, हिमांशु बिष्ट, सतीश भट्ट, अमित पांडे, रविंद्र पांडे ‘पपीहा’, रामरतन यादव, रावेंद्र रवि तथा डॉ. महेंद्र प्रताप पांडे ‘नंद’ प्रमुख रूप से शामिल हैं।
सभी शुभचिंतकों ने उम्मीद जताई है कि डॉ. पंत के संस्थान में शामिल होने से उत्तराखंड की विभिन्न बोलियों, जनजातीय भाषाओं और कुमाऊंनी-गढ़वाली साहित्य को नया आयाम मिलेगा और उनका संरक्षण अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगा।