रामनगर।उत्तराखंड की राजनीति में अक्सर विधायक निधि के सही और समय पर इस्तेमाल को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब इसी कड़ी में रामनगर का सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। स्थानीय मुद्दों और जनविकास की आवाज बुलंद कर रहे तारा घिल्डियाल ने विधायक निधि के खर्च और उपयोग को लेकर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि विधायक निधि किसी व्यक्तिगत नेता की नहीं, बल्कि रामनगर की जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई है। ऐसे में जनता को यह जानने का पूरा और लोकतांत्रिक अधिकार है कि उनके हक का कितना पैसा विकास के नाम पर खर्च हुआ और कितना बजट फाइलों में धूल फांक रहा है।
रामनगर की जनता का सीधा सवाल: कहाँ गया विकास का बजट?
तारा घिल्डियाल ने सीधे तौर पर जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर उंगली उठाते हुए चार तीखे सवाल दागे हैं। रामनगर की जनसभाओं और सोशल मीडिया पर अब यह सवाल तेजी से गूंज रहा है:
- रामनगर क्षेत्र के लिए कुल कितनी विधायक निधि स्वीकृत हुई?
- स्वीकृत बजट में से वास्तव में कितनी राशि धरातल पर खर्च की गई?
- जो पैसा खर्च हुआ, वह किन-किन विकास कार्यों और योजनाओं में लगा?
- और सबसे अहम सवाल—जो राशि अभी तक खर्च नहीं हो पाई और अनयूज्ड पड़ी है, उसका जिम्मेदार आखिर कौन है?
तारा घिल्डियाल ने जोर देकर कहा कि यदि जनता के विकास के लिए सरकारी खजाने में पैसा उपलब्ध है और फिर भी क्षेत्र की सड़कें, स्वास्थ्य सुविधाएं, पेयजल व्यवस्था और स्कूल बदहाल हैं, तो इसकी सीधी जवाबदेही तय होनी ही चाहिए। सरकारी बजट को तिजोरी में बंद रखकर यह दावा करना कि काम हो रहा है, रामनगर के लोगों के साथ छलावा है।
“निधि बचाने वाला नहीं, निधि से जिंदगी बदलने वाला नेतृत्व चाहिए”
रामनगर की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर कटाक्ष करते हुए तारा घिल्डियाल ने कहा कि अब वह दौर बीत चुका है जब जनता महज खोखले आश्वासनों और चुनावी भाषणों से संतुष्ट हो जाती थी। आज की जनता जागरूक है और उसे जमीनी परिणाम चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारा मानना एकदम साफ है—रामनगर को ऐसा प्रतिनिधि नहीं चाहिए जो विधायक निधि को बचाकर अपनी नाकामी छुपाए, बल्कि ऐसा नेतृत्व चाहिए जो एक-एक रुपये का पारदर्शी और सही इस्तेमाल करके रामनगर के आम नागरिक के जीवन स्तर को बेहतर बनाए।”
तारा घिल्डियाल का कहना है कि सिर्फ विधायक चुन लेना ही काफी नहीं है। रामनगर को एक ऐसा जवाबदेह नेतृत्व चाहिए जो जनता के बीच जाकर हर काम की रिपोर्ट दे। यदि कोई धनराशि समय पर खर्च नहीं होती है, तो इसका सीधा मतलब है कि प्रशासनिक ढिलाई और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है।
हिसाब की राजनीति और पारदर्शी व्यवस्था की मांग
रामनगर के हक की लड़ाई को आगे बढ़ाते हुए तारा घिल्डियाल ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रहेगा। इसे हर गांव, हर गली और हर चौराहे तक ले जाया जाएगा। जनता के बीच जाकर यह आकलन किया जाएगा कि जिन योजनाओं के नाम पर फंड जारी हुआ था, उनका वास्तविक लाभ आम नागरिक तक पहुंचा या नहीं।
राजनीति के बदलते ढर्रे पर बात करते हुए तारा घिल्डियाल ने कहा कि राजनीति का केंद्र बिंदु कोई व्यक्ति विशेष, पार्टी या कुर्सी नहीं, बल्कि आम जनता और क्षेत्र का विकास होना चाहिए। रामनगर में एक ऐसी राजनीतिक संस्कृति की सख्त जरूरत है जहाँ:
- हर एक रुपये का सार्वजनिक हिसाब-किताब हो।
- निर्माण और विकास कार्यों की गुणवत्ता की कड़ी निगरानी की जाए।
- हर फैसले और फंड के आवंटन में जनता के सामने शत-प्रतिशत पारदर्शिता हो।
“संकल्प के साथ विकल्प” — रामनगर के हक की लड़ाई
“रामनगर का लाल” के रूप में अपनी पहचान बना रहे तारा घिल्डियाल ने नारा दिया है— “संकल्प के साथ विकल्प”। उनका कहना है कि रामनगर की जनता अब केवल भाषणों की भूलभुलैया में भटकने वाली नहीं है। अब जब भी रामनगर की राजनीति की बात होगी, तो वह सिर्फ और सिर्फ ‘काम की राजनीति’ होगी और ‘हिसाब की राजनीति’ होगी।
रामनगर के विकास के रुके हुए पहिए को गति देने और जन-जन तक उनके हक का विकास पहुंचाने के लिए यह संघर्ष पूरी मजबूती के साथ लड़ा जाएगा। विधायक निधि का सच सामने लाने की इस मुहिम ने रामनगर के सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है और अब देखना यह होगा कि इस पर जिम्मेदार प्रतिनिधि क्या जवाब देते हैं।