चमोली (उत्तराखंड):उत्तराखंड के मुख्य सेवक पुष्कर सिंह धामी ने बदरीनाथ धाम पहुंचकर भगवान बदरीविशाल के दर्शन-पूजन किए। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बदरीविशाल की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की मंगल कामना की। दर्शन के उपरांत उन्होंने बदरीनाथ मास्टर प्लान के तहत संचालित हो रहे विभिन्न विकास और निर्माण कार्यों का धरातल पर जाकर जायजा लिया।
दर्शन-पूजन के बाद मुख्य सेवक ने आस्था पथ सहित धाम में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों की जमीनी स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों से निर्माण कार्यों की भौतिक प्रगति की विस्तृत जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सभी निर्माण कार्य तय समय सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के मानकों के अनुरूप पूरे किए जाएं।
कार्यों की गुणवत्ता पर जोर देते हुए यह बात रेखांकित की गई कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान धाम आने वाले श्रद्धालुओं की सुगमता और सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए। इसके साथ ही बदरीनाथ धाम की पौराणिक, आध्यात्मिक और पारंपरिक गरिमा से किसी भी तरह का समझौता न हो।
मास्टर प्लान से बदलेगी बदरीनाथ धाम की तस्वीर
बदरीनाथ धाम को देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुव्यवस्थित और भव्य रूप देने के लिए मास्टर प्लान पर तेजी से काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे इस ड्रीम प्रोजेक्ट के जरिए धाम की पारंपरिक पहचान, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक नागरिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि मास्टर प्लान के तहत विकसित की जा रही नई सुविधाओं से भविष्य में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ ही पैदल रास्तों, विश्राम स्थलों और सुरक्षा इंतजामों को नया रूप दिया जा रहा है।
‘बदरीनाथ धाम कथा महोत्सव’ में पहुंचे 150 से अधिक संत
स्थल निरीक्षण के बाद स्वामीनारायण गुरुकुल राजकोट संस्थान के तत्वावधान में आयोजित ‘बदरीनाथ धाम कथा महोत्सव’ में सहभागिता की गई। इस पावन अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए 150 से अधिक संत-साध्वियों और 1200 से अधिक हरिभक्तों का जमघट देखने को मिला। महोत्सव में स्वामीनारायण गुरुकुल राजकोट के महंत स्वामी देवप्रसाददास जी महाराज और सद्गुरुवर्य धर्मवल्लभदास जी स्वामी सहित कई प्रमुख संत उपस्थित रहे।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य सेवक ने कहा कि बदरीनाथ धाम भारत की सनातन चेतना, तप, साधना और आध्यात्मिक विरासत का प्रमुख स्तंभ है। शास्त्रों में वर्णित इस पवित्र भूमि पर संतों और साधकों के बीच उपस्थित होना परम सौभाग्य की बात है। संत समाज का मार्गदर्शन और आशीर्वाद हमेशा से समाज तथा राष्ट्र को सही दिशा दिखाने का काम करता रहा है। ऐसे आयोजनों से हमारी सनातन परंपराएं, नैतिक मूल्य और सांस्कृतिक धरोहर नई पीढ़ी तक सहजता से पहुंचती हैं।
21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बनाने का संकल्प
संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस कथन को याद किया गया जिसमें उन्होंने केदारनाथ की भूमि से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया था। राज्य सरकार इस संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता से काम कर रही है। उत्तराखंड को प्रकृति ने न केवल अनुपम सौंदर्य दिया है, बल्कि चारधाम, गंगा-यमुना, हिमालय और हेमकुंड साहिब जैसी अद्वितीय आध्यात्मिक संपदा भी सौंपी है।
सरकार की प्राथमिकता इन सभी आस्था केंद्रों का इस तरह से विकास करना है कि श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलें और धामों की मूल सांस्कृतिक एवं धार्मिक गरिमा भी अक्षुण्ण बनी रहे।
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अमला और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस अवसर पर स्थानीय सहकारिता प्रतिनिधि, जनसेवक और भारी संख्या में श्रद्धालु भी उपस्थित रहे।