देहरादून।उत्तराखंड में नीट यूजी राज्य केन्द्रीकृत काउंसिलिंग के दौरान कूटरचित (फर्जी) प्रमाणपत्रों के सहारे मेडिकल सीटों पर कब्जा जमाने की कोशिश करने वालों पर गाज गिरी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अपनाया है। शुरुआती जांच में फर्जी दस्तावेज पाए जाने के बाद 8 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर उनकी प्रवेश प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए काउंसिलिंग में आरक्षित श्रेणियों का लाभ लेने वाले सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का गहन सत्यापन कराने का फैसला लिया है।
दूध का दूध और पानी का पानी करने के निर्देश
नीट यूजी काउंसिलिंग के दौरान जैसे ही फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आईं, शासन-प्रशासन हरकत में आ गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए ताकि सत्यता सामने आ सके। मंशा साफ है कि यदि किसी ने गलत तथ्यों या जाली दस्तावेजों के आधार पर अनुचित लाभ उठाया है, तो उसे बख्शा न जाए। इसके अलावा ऐसे फर्जी दस्तावेज तैयार करने और जारी करने की प्रक्रिया में शामिल दोषी कर्मचारियों व बिचौलियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ भी कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
जिला प्रशासन की जांच में खुली पोल
शिकायतों के आधार पर जिला प्रशासन के स्तर से कराई गई प्राथमिक जांच में अब तक 8 अभ्यर्थियों के दस्तावेज फर्जी साबित हुए हैं। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों को खारिज किया और उनके दाखिले की प्रक्रिया रद्द कर दी। हालांकि, जांच यहीं खत्म नहीं हुई है। प्रशासन को अंदेशा है कि कुछ अन्य छात्रों ने भी विभिन्न आरक्षित श्रेणियों में कूटरचित कागजातों का सहारा लिया हो सकता है। फिलहाल जिला प्रशासन की टीम अलग-अलग स्तरों पर इन संदिग्ध मामलों की बारीकी से पड़ताल कर रही है।
दोषियों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
मामले पर मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच के दौरान किसी भी अभ्यर्थी का प्रमाणपत्र फर्जी या कूटचित पाया जाता है, तो केवल उसका दाखिला निरस्त नहीं किया जाएगा, बल्कि मामले में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मेधावी और योग्य अभ्यर्थी के अधिकारों का हनन न हो और कोई अयोग्य व्यक्ति फर्जीवाड़े के बल पर किसी योग्य छात्र की सीट न छीन सके।
नकल के बाद अब जाली दस्तावेजों पर नकेल
उत्तराखंड सरकार इससे पहले प्रदेश में कड़ा ‘नकल विरोधी कानून’ लागू कर भर्ती परीक्षाओं में होने वाली धांधलियों और पेपर लीक जैसे मामलों पर स्थायी रूप से रोक लगा चुकी है। इस कानून के बाद से राज्य में प्रतियोगी एवं भर्ती परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से आयोजित की जा रही हैं। नकल माफिया पर नकेल कसने के बाद अब सरकार ने शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेने वालों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सरकार की इस सख्त नीति से स्पष्ट संदेश गया है कि राज्य में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार या फर्जीवाड़े को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए प्रवेश का अपराध भी नकल जितना ही संगीन है। इसलिए प्रकरण संज्ञान में आते ही हमने अधिकारियों को इस मामले में पारदर्शी जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद अब तक जांच में फर्जी प्रमाणित हो चुके प्रमाणपत्रों का निरस्त किया जा चुका है, जांच का दायरा बढ़ाते हुए, अब सभी श्रेणी के प्रमाणपत्रों की जांच की जाएगी। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड