रामनगर। अंकिता भंडारी हत्याकांड की चौथी पुण्यतिथि पर एक बार फिर न्याय की आवाज बुलंद हुई है। घटना के चार साल बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार और जनसंगठनों में न्याय न मिलने को लेकर गहरा रोष व्याप्त है। इसी कड़ी में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने उप जिलाधिकारी रामनगर कार्यालय के माध्यम से प्रदेश के राज्यपाल को एक ज्ञापन प्रेषित किया है। ज्ञापन के जरिए राज्य सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए मामले की तत्काल प्रभावी सीबीआई जांच की मांग दोहराई गई है।
सीबीआई जांच की घोषणा केवल कागजी? संगठनों ने लगाए गंभीर आरोप
राज्यपाल को प्रेषित ज्ञापन में राज्य सरकार और मुख्यमंत्री के रुख पर गहरा असंतोष व्यक्त किया गया। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार द्वारा सीबीआई जांच की घोषणा किए हुए 9 महीने का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन धरातल पर अब तक जांच की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।
ज्ञापन के माध्यम से यह सवाल खड़ा किया गया कि जब सरकार ने खुद जांच सीबीआई को सौंपने का आश्वासन दिया था, तो आखिर 9 महीने बाद भी मामले में केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई शुरू क्यों नहीं हुई? इस विफलता ने प्रदेश की जनता के मन में कई तरह के संशय पैदा कर दिए हैं।
सोशल मीडिया में उजागर ‘वीवीआईपी’ नाम पर साधी चुप्पी
प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन में सबसे बड़ा मुद्दा उस ‘वीवीआईपी’ चेहरे को लेकर उठाया, जिसका नाम पिछले लंबे समय से सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चाओं में आ रहा है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जांच एजेंसियों, स्थानीय पुलिस और सीबीआई किसी ने भी आज तक उस संदिग्ध वीवीआईपी से पूछताछ करने की जहमत नहीं उठाई।
संगठनों का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण सुराग और चर्चित नाम के बावजूद जांच से उसे दूर रखना बेहद चौंकाने वाला है। इस रवैये से साफ संदेश जा रहा है कि पूरी व्यवस्था मामले से जुड़े प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है।
निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मुख्य मांगें
ज्ञापन में मुख्य रूप से दो प्रमुख बिंदुओं पर राज्यपाल का ध्यान आकर्षित कराया गया है:
- सीबीआई जांच की तत्काल शुरुआत: 9 महीने पहले घोषित की गई सीबीआई जांच की प्रक्रिया को बिना किसी और देरी के धरातल पर शुरू किया जाए।
- वीवीआईपी से पूछताछ और कठोर कार्रवाई: सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से सामने आए प्रभावशाली व्यक्ति का नाम जांच में शामिल कर उससे कड़ी पूछताछ की जाए और कानूनी कार्रवाई हो।
न्याय की लड़ाई में एकजुट हुए कई सामाजिक संगठन
उप जिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से ज्ञापन सौंपने वालों में क्षेत्र के कई सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता और जनसंगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे। इस दौरान प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की प्रतिनिधि तुलसी छिम्बाल, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के नगर संयोजक आसिफ, ब्लॉक संयोजक सुनील परिवार, परिवर्तनकामी छात्र संगठन के प्रतिनिधि रवि, कमला, गीता समेत कई लोग मौजूद रहे।
सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि जब तक इस मामले में पूरी तरह निष्पक्ष जांच नहीं होती और मुख्य दोषियों तथा मददगारों को सजा नहीं मिल जाती, तब तक न्याय की यह लड़ाई सड़क से लेकर कानूनी मंचों तक जारी रहेगी।