कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में हाथी दिवस की धूम: स्वादिष्ट दावत के साथ दिया गया मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व का संदेश
कालागढ़ (उत्तराखंड)। कॉर्बेट वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र, कालागढ़ में वन्यप्राणी सप्ताह 2026 के भव्य आयोजन के तहत रविवार, 4 अक्टूबर की सुबह उत्साह और पर्यावरण संरक्षण की भावना से सराबोर रही। सुबह 9 बजे आयोजित विशेष ‘हाथी दिवस’ कार्यक्रम में गजराजों का अनूठा सम्मान देखने को मिला। जंगलों के इस सबसे विशाल और बुद्धिमान प्राणी के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए एक खास भोज का आयोजन किया गया, जहाँ विभागीय हाथियों को उनके पसंदीदा व्यंजन परोसे गए।
गुड़, गन्ना और आटे के लड्डुओं से सजी हाथियों की थाली
हाथी दिवस की शुरुआत बेहद रोचक और मिठास भरे माहौल में हुई। वन क्षेत्राधिकारी नंदकिशोर रुबाली की देखरेख में विभागीय हाथियों के लिए विशेष पौष्टिक भोजन की व्यवस्था की गई थी। गजयूथ को गुड़, ताज़ा गन्ना, आटे के बने बड़े-बड़े लड्डू, केले और हरी-ताजी सब्ज़ियाँ खिलाई गईं। स्वादिष्ट व्यंजनों को देखकर हाथियों के चेहरे पर अलग ही खुशी दिखाई दे रही थी, जिसे देखकर वहाँ मौजूद लोग और बच्चे बेहद रोमांचित हो उठे।
सावन और गजराज बने बच्चों के आकर्षण का केंद्र
हाथीशाला में मौजूद ‘सावन’ और ‘गजराज’ नाम के हाथियों के साथ दो अन्य छोटे हाथियों की मौजूदगी ने पूरे माहौल को उत्सव जैसा बना दिया। कार्यक्रम में शामिल हुए स्थानीय निवासियों, वन विभाग के स्टाफ और ख़ास तौर पर बच्चों के बीच ये हाथी आकर्षण का मुख्य केंद्र बने रहे। बच्चों ने गजयूथ को पास से देखा और उनके व्यवहार को समझकर पर्यावरण तथा वन्यजीवों के प्रति अपनी जिज्ञासा जाहिर की।
“हाथियों को है इंसान के सहयोग की ज़रूरत”
इस अवसर पर वन क्षेत्राधिकारी नंदकिशोर रुबाली ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए हाथियों के पारिस्थितिक महत्व पर गहराई से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जंगल के पारिस्थिक तंत्र (Ecosystem) को संतुलित बनाए रखने में हाथियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि “हाथी न केवल जंगलों के फैलाव और बीजों के अंकुरण में मदद करते हैं, बल्कि वे पूरे जंगल के जीवन चक्र को कायम रखते हैं। आज के समय में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए हाथियों को इंसानों के प्रति सहानुभूति और सहयोग की सख्त आवश्यकता है।” उन्होंने सभी से अपील की कि वनों के संरक्षण और वन्यजीवों के सुरक्षित गलियारों को बनाए रखने में आम जनता को भी सजग रहना होगा।
प्रशिक्षण केंद्र के स्टाफ और प्रशिक्षुओं ने लिया भाग
वन्यप्राणी सप्ताह के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर कालागढ़ रेंज और प्रशिक्षण केंद्र के अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रशिक्षु वन आरक्षकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सुनील कुमार (वन दरोगा/कॉम्प्रा), हरपाल सिंह (वन दरोगा), रितेश त्रिपाठी, चालक दिलशाद और श्रमिक जफर अली सहित कई वनकर्मियों की प्रमुख उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के अंत में नंदकिशोर रुबाली ने कॉर्बेट वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र में उपस्थित सभी प्रतिभागियों, वनकर्मियों और नागरिकों का आभार व्यक्त किया तथा सभी के लिए अल्पाहार (जलपान) की व्यवस्था की गई।
पर्यावरण संतुलन का प्रतीक हैं हाथी
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का यह प्रयास न केवल हाथियों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने की एक मिसाल है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि प्रकृति और मानव का सहअस्तित्व ही सुंदर भविष्य की कुंजी है। वन्यप्राणी सप्ताह के तहत आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में प्रकृति संरक्षण के प्रति एक सकारात्मक बदलाव लाते हैं।